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(लेखक इस किताब से प्राप्त अपनी संपूर्ण आय का १००% गौतम बुद्ध की शिक्षाओं को बाँटने के लिए दान-पुण्य के कार्यों में दान कर रहे हैं।)
जीवन अभ्यास का विकास: पथ जो ले जाता है निर्वाण की ओर (खंड १)
बुद्ध के पहले शब्दों की शुरुआत से लेकर मृत्यु से पहले उनके "अंतिम शब्दों" तक, उनके शब्दों के माध्यम से यात्रा करें।
"जीवन अभ्यास का विकास: पथ जो ले जाता है निर्वाण की ओर" नामक किताब गौतम बुद्ध की शिक्षाओं को समझने और उनका अभ्यास करने में आपकी सहायता करने के लिए निर्वाण के पथ पर एक जरूरी मार्गदर्शिका है। यह किताब आपको बुद्ध की शिक्षाओं को समझने और उनका अभ्यास करने के लिए एक ढांचा प्रदान करती है, जिससे आप निर्वाण की प्राप्ति की ओर अग्रसर हो सकें - एक आनंद के साथ शांत, निश्चल, निर्मल और संतुष्ट मन जो नित्य है।
गौतम बुद्ध की शिक्षाएँ विश्वास पर आधारित नहीं हैं। उनकी शिक्षाओं को मार्गदर्शन के साथ सीखना और अभ्यास करना जरूरी है, ताकि आप स्वतंत्र रूप से उनकी शिक्षाओं में निहित सत्य को देख सकें और प्रज्ञा प्राप्त कर सकें। यही नई प्रज्ञा है जिससे मन धीरे-धीरे संसार में अलग तरीके से कार्य करना शुरू करता है और आनंद के साथ शांत, निश्चल, निर्मल और संतुष्ट मन की प्राप्ति होती है... यही निर्वाण प्राप्त मन है।
क्योंकि हम जो कुछ भी करते हैं उसका अनुभव मन के जरिए होता है; यदि मन आनंद के साथ शांत, निश्चल, निर्मल और संतुष्ट है, तो व्यक्ति एक ऐसा जीवन अनुभव करेगा जो आनंद के साथ शांत, निश्चल, निर्मल और संतुष्ट होगा। निर्वाण प्राप्ति वह मन है जिसने आनंद के साथ शांति, निश्चलता, निर्मलता और संतोष प्राप्त कर लिया है जो नित्य है।
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