Description
“पेशेंट कनेक्ट सिस्टम” एक व्यावहारिक हॉस्पिटल वर्कबुक और स्टाफ ट्रेनिंग प्लेबुक है, जिसका उद्देश्य मरीज की देखभाल को केवल अस्पताल में भर्ती रहने तक सीमित न रखकर डिस्चार्ज के बाद की रिकवरी, फॉलो-अप, कम्युनिकेशन और पेशेंट एजुकेशन तक व्यवस्थित करना है। यह पुस्तक अस्पतालों को एक ऐसा सिस्टम-आधारित मॉडल विकसित करने में मदद करती है, जिसमें मरीज और परिवार को सही समय पर सही जानकारी मिले, महत्वपूर्ण फॉलो-अप छूटे नहीं, स्टाफ की जिम्मेदारियाँ स्पष्ट हों, मरीज का डेटा सुरक्षित और व्यवस्थित रहे तथा एसओपी, डिजिटल कम्युनिकेशन, क्वेश्चनेयर, फीडबैक, ऑटोमेशन और एआई जैसे आधुनिक साधनों का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग किया जा सके। इसका मूल विचार सरल है—एक अच्छा इलाज केवल सफल प्रोसिजर नहीं, बल्कि मरीज के साथ उपचार की पूरी यात्रा में लगातार जुड़े रहने का नाम है।
डॉ. प्रदीप साहू
एमबीबीएस • एमएस • एमसीएच • एफएमएएस
डॉ. प्रदीप साहू एक अनुभवी बाल शल्य चिकित्सक हैं, जिन्होंने बाल शल्य चिकित्सा में उच्च विशेषज्ञता प्राप्त की है। उन्होंने पीजीआई चंडीगढ़ से बाल शल्य चिकित्सा में एमसीएच की शिक्षा प्राप्त की है तथा शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में लगभग २० वर्षों का अनुभव रखते हैं।
उनका विशेष कार्यक्षेत्र नवजात शिशुओं, बच्चों और किशोरों में होने वाली विभिन्न शल्य समस्याओं का निदान और उपचार है। आधुनिक शल्य तकनीकों, लैप्रोस्कोपिक सर्जरी तथा रोगी-केंद्रित चिकित्सा व्यवस्था में उनकी विशेष रुचि है। उन्होंने वर्ल्ड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, गुड़गांव से लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है।
डॉ. साहू का मानना है कि सफल चिकित्सा केवल सही ऑपरेशन या सही दवा तक सीमित नहीं है। मरीज और उसके परिवार को यह समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि—
बीमारी क्या है, क्यों हुई है, उपचार क्यों आवश्यक है, आगे क्या होने वाला है और घर जाने के बाद क्या सावधानी रखनी है।
इसी सोच से “पेशेंट कनेक्ट सिस्टम” की अवधारणा विकसित हुई।
इस पुस्तक के माध्यम से उनका प्रयास है कि अस्पतालों में मरीजों के साथ संवाद, उपचार के बाद फॉलो-अप, पेशेंट एजुकेशन, डेटा प्रबंधन, स्टाफ ट्रेनिंग और गुणवत्ता व्यवस्था को एक व्यवस्थित प्रणाली में बदला जा सके।
उनका विश्वास है—
“मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज करना उपचार का अंत नहीं है; यह उसकी रिकवरी के अगले चरण की शुरुआत है।”
यह पुस्तक उसी सोच को एक व्यावहारिक और दोहराए जा सकने वाले हॉस्पिटल सिस्टम में बदलने का प्रयास है।
डॉ. प्रदीप साहू
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