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Jo Laut ke Phir na Aye (eBook)

Yado ke Panne, Khamoshi ke Sath
Type: e-book
Genre: Entertainment
Language: Hindi
Price: ₹500
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

“जो लौट के फिर ना आये” महज़ एक किताब नहीं, बल्कि उन अज़ीज़ों की यादों का एक मुक़द्दस सरमाया है जो कभी हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा थे और आज इस फ़ानी दुनिया से रुख़सत हो चुके हैं।

इस किताब में मुसन्निफ़ फ़ैसल आरिफ़ ने अपने उन नज़दीकी मरहूमीन रिश्तेदारों के अहवाल, उनकी शख़्सियत के रंग, और उनके साथ गुज़ारे अनमोल लम्हात को बड़ी चाबुकदस्ती और ख़ुलूस के साथ क़लमबंद किया है। यह किताब उन रिश्तों की मिठास और उनके जाने के बाद पैदा होने वाले ख़ला को गहराई से महसूस कराती है।

यह तालीफ़ उन तमाम पाठकों के दिलों को छुएगी, जिन्होंने कभी अपने किसी अज़ीज़ को खोया है और उनकी यादों को अपने सीने से लगाए बैठे हैं।

About the Author

मैं फ़ैसल आरिफ़, जनाब आरिफ़ मारहरवी का साहबज़ादा हूँ और मेरा ताल्लुक़ मारहरा (उत्तर प्रदेश) के एक अदबी व सुफ़ियाना ख़ानदान से है। अदब और तख़्लीक़ी तहरीर से मेरा हमेशा से गहरा लगाव रहा है।

मेरी किताब “जो लौट के फिर ना आये” मेरे उन अज़ीज़ रिश्तेदारों की यादों, उनके अहवाल और ज़िंदगी के अनमोल लम्हात पर मबनी है, जो अब इस फ़ानी दुनिया से रुख़सत हो चुके हैं। अपनी इस तालीफ़ के ज़रिए मैंने अपने अज़ीज़ मरहूमीन की यादों को हमेशा के लिए ज़िंदा रखने और उन्हें ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश करने की एक पुरख़ुलूस कोशिश की है।

Book Details

Number of Pages: 458
Availability: Available for Download (e-book)

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Jo Laut ke Phir na Aye

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