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Sarkari Naukari (eBook)

a comic satire
Type: e-book
Genre: Drama/Play
Language: Hindi
Price: ₹150
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

वर्तमान समाज में उपभोक्तावाद की पल्लवित होती संस्कृति में झूठे दिखावे और दम्भ के चलते हम लोगों ने अपने जीवन मे साधनों को साध्य में बदल लिया है और अपनी इन्हीं ख्वाहिशों को पूरा करने की होड़ में लग गये हैं। हमें इन्ही कृत्रिम आवश्यकताओं अथवा तृष्णाओं की पूर्ति में सही-गलत का भी भान नहीं है, उचित-अनुचित किसी भी प्रकार से हमें अपनी इच्छाओं की पूर्ति करनी है, और तो और हम अनुचित मार्ग अपना कर भी उसे न्यायोचित बना लेने की पुरजोर कोशिश करते हंै जिससे साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।

मेरी इस कहानी की मुख्य पात्र प्रेरणा भी इसी लोलुपता के चक्कर में क्या कुछ कर गई और फिर क्या हुआ जानने के लिए पढ़िये
‘‘सरकारी नौकरी’’।

About the Author

लोकेश पालीवाल, विज्ञान विषय में स्नातक, लेखन एवं फिल्म निर्माण में रूची रखने वाले एक सफल आई.टी. प्रोफेशनल एवं सामाजिक कार्यकर्ता है। अपने सामाजिक उपक्रम मेरीजन्मभूमी के तहत ग्रामिण विकास के क्षैत्र में काम करते हुए ईचकेप, साउथ कोरिया, केटेगरी 2 सेन्टर यूनेस्को के लिए सस्टेनेबल डवलपमेन्ट गोल 2030 हेतु काम कर रहे है। आपको जीवंत विरासत सरक्षण के अपने प्रयासों के तहत मेवाड़ की लोक नृत्य एवं सांस्कृतिक विद्या गवरी के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु प्रकाशित ’’गवरी -मेवाडस् ईलेक्ट्रीफाईगं डांस ड्रामा एन इलस्ट्रेटेड इन्ट्रोडेक्शन’’ नामक अंग्रेजी पुस्तक में सयुक्त योगदान तथा गवरी एन ईन्ट्रोडक्शन नामक डाॅक्युमेन्टरी के
निर्देशन के लिये जाने जाते है।
इसी दिशा में लोककला गवरी की मौलिक कथा भियावड़ का हिन्दी नाटक में रूपान्तरण तथा रगंमंचीय प्रर्दशन उनका एक सफल प्रयोग रहा। पालीवाल का ‘‘शाही फ्युनरल’’ नामक नाटक समाज में बढ़ते आधुनिकरण तथा भावनात्मकता के लोप पर हास्य व्यंग देश के प्रमुख रंगमचों पर मंचित हुआ है। आपने मेवाड के विश्व प्रसिद्व हल्दिघाटी युद्ध में महाराणा प्रताप का साथ देने वाले राणापूँजा पर अध्ययन एवं वृत्तचित्र फिल्म का निर्माण किया है। समाज के सर्वांगिण विकास हेतु साहित्य तथा कला को एक सशक्त उत्पे्र्ररक एवं प्रभावी माध्यम मानते हुए विभिन्न लेखो, कहानीयों, नाटकों के साथ-साथ टेलिविजन, लघु फिल्मो तथा वृत्तचित्रों का भी निर्माण किया है।

Book Details

Publisher: Lokesh Paliwal
Number of Pages: 45
Availability: Available for Download (e-book)

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