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ज्यादा करो, आगे बढ़ो — जोखिम लो, रुकने की आदत छोड़ो
क्या आप किसी काम को इसलिए टाल रहे हैं क्योंकि आपको लगता है कि अभी सही समय नहीं आया? क्या आप पहले पूरी clarity, confidence या perfect plan का इंतज़ार करते रहते हैं?
“ज्यादा करो, आगे बढ़ो” इसी रुकने की आदत को चुनौती देती है।
यह किताब आपको बिना सोचे-समझे भागना नहीं सिखाती और न ही चौबीसों घंटे काम करने वाली toxic hustle culture को बढ़ावा देती है। यहाँ “ज्यादा” का मतलब है—ज्यादा कोशिश, ज्यादा हिम्मत, ज्यादा experiments और ज्यादा attempts। Risk का मतलब लापरवाही नहीं, बल्कि डर के बावजूद calculated कदम उठाना है।
किताब में action लेने, उलझन के बीच आगे बढ़ने, काम को गति देने, गलतियों से सीखने, तनाव को सही दिशा में इस्तेमाल करने, पुराने तरीकों को चुनौती देने, healthy competition अपनाने और हर बातचीत में अवसर पहचानने जैसे विषयों को सरल और व्यावहारिक तरीके से समझाया गया है।
हर chapter के साथ दिया गया “आज का अभ्यास” किताब को सिर्फ पढ़ने की चीज़ नहीं, बल्कि जीवन में आज़माने वाला practical tool बनाता है।
अगर आप बहुत सोचने के बावजूद शुरुआत नहीं कर पा रहे हैं, बार-बार सही समय का इंतज़ार कर रहे हैं या अपनी क्षमता से पीछे रह जाने का एहसास करते हैं, तो यह किताब आपके लिए है।
पढ़िए। आज़माइए। गलती कीजिए। सीखिए। और आगे बढ़िए।
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