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'अन्न ही औषधि है' केवल भोजन की पुस्तक नहीं, बल्कि खेत की मिट्टी से लेकर रसोई के चूल्हे और मानव स्वास्थ्य के बीच के सनातन विज्ञान को उजागर करने वाला एक व्यावहारिक मार्गदर्शक ग्रंथ है।
इस पुस्तक में बताया गया है कि कैसे पंचांग, चंद्र-कला और ऋतुचर्या के अनुरूप उपजाया गया सात्विक अन्न देह के लिए अमृत बन जाता है, जबकि गलत पद्धति से पकाया और खाया गया भोजन गंभीर व्याधियों का कारण बनता है।
पुस्तक की मुख्य विशेषताएं:
मिट्टी का भाव व रजोमती काल: वैदिक कृषि पंचांग और बीजारोपण की आदर्श काल-गणना।
12 महीनों का आहार-संयम: ऋतु-चक्र के अनुसार क्या खाएं और क्या त्यागें।
पाक-संस्कार: मिट्टी की हांडी, पत्थर की चक्की और भोजन पकाने का वैज्ञानिक दृष्टिकोण।
भीतरी चूल्हा (जठराग्नि) व त्रिदोष: 'भोजनान्ते विषं वारि' का रहस्य और वात-पित्त-कफ का संतुलन।
रसोई के चार पहिए: तेल, नमक, मीठा और मसालों की सच्चाई।
इंद्रिय-उपवास व 21 दिन की थाली: कायाकल्प हेतु दैनिक आहार-तालिका और अन्न-दान का संकल्प।
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