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सनातन धर्म के आकाश में जगतगुरु श्री निंबार्काचार्याचार्य वह अक्षय सूर्य हैं, जिनकी दिव्य वैष्णव-भक्ति ज्योति सहस्राब्दियों से भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को आलोकित करती आई है। यह ग्रंथ उन्हीं युगपुरुष के जीवन-चरित्र, उनके द्वारा प्रवर्तित द्वैताद्वैत दर्शन, और सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा के इतिहास पर आधारित एक प्रामाणिक शोधपरक कृति है।
लेखक ने अपने वर्षों के गहन अनुसंधान, प्राचीन ग्रंथों के अवलोकन तथा तीर्थस्थलों के प्रत्यक्ष भ्रमण से प्राप्त तथ्यों के आधार पर इस ग्रंथ की रचना की है। इसमें निंबार्काचार्य के जन्म, तपस्या, दार्शनिक सिद्धांतों, तथा उनकी परंपरा के भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति पर पड़े प्रभाव का विस्तृत एवं सुसंगत वर्णन किया गया है।
इतिहास, अध्यात्म एवं वैष्णव दर्शन में रुचि रखने वाले पाठकों, शोधार्थियों तथा साधकों के लिए यह ग्रंथ एक अमूल्य संदर्भ-स्रोत सिद्ध होगा।
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