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सनातन अयोध्या खंड–2: रामजन्मभूमि की रक्षा में वैष्णव बैरागी अखाड़ों का योगदान (eBook)

रामजन्मभूमि की रक्षा में वैष्णव बैरागी अखाड़ों का योगदान
Type: e-book
Genre: Religion & Spirituality, History
Language: Hindi
Price: ₹149
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

सनातन अयोध्या खंड–2

रामजन्मभूमि की रक्षा में वैष्णव बैरागी अखाड़ों का योगदान

अयोध्या का इतिहास केवल एक धार्मिक स्थल का इतिहास नहीं, बल्कि भारतीय समाज, संत-परंपराओं, धार्मिक संस्थाओं और विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों से जुड़ा एक व्यापक विषय है। ‘सनातन अयोध्या खंड–2’ इसी व्यापक इतिहास के एक महत्वपूर्ण पक्ष—रामजन्मभूमि से जुड़े वैष्णव बैरागी अखाड़ों और संत-परंपरा—का शोधपरक अध्ययन प्रस्तुत करता है।

इस पुस्तक में उपलब्ध ऐतिहासिक सामग्री, दस्तावेजों, प्रकाशित ग्रंथों और अन्य स्रोतों के आधार पर वैष्णव बैरागी परंपरा की ऐतिहासिक भूमिका को समझने का प्रयास किया गया है। पुस्तक का उद्देश्य किसी अप्रमाणित कथा को इतिहास के रूप में प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर विषय को पाठकों के सामने रखना है।

पुस्तक में विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों के उल्लेख, संदर्भ और दस्तावेजी सामग्री के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया गया है कि अयोध्या की धार्मिक परंपरा में वैष्णव बैरागी अखाड़ों और संतों की उपस्थिति तथा भूमिका को ऐतिहासिक स्रोत किस प्रकार दर्ज करते हैं।

यह पुस्तक उन पाठकों, शोधकर्ताओं और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है जो अयोध्या, रामजन्मभूमि, वैष्णव बैरागी परंपरा और भारतीय धार्मिक-सामाजिक इतिहास को स्रोतों के आधार पर समझना चाहते हैं।

शोध का मूल सिद्धांत:
“दस्तावेज पहले, निष्कर्ष बाद में।”

जहाँ किसी विषय के संबंध में प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं या प्रमाण अपूर्ण हैं, वहाँ उसे निश्चित ऐतिहासिक तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय सावधानी और स्पष्टता को प्राथमिकता दी गई है।

About the Author

नरेश दास वैष्णव निम्बार्क
सेवानिवृत्त मानद नायब सूबेदार, भारतीय सेना | इतिहासकार | शोधकर्ता | लेखक

नरेश दास वैष्णव निम्बार्क भारतीय इतिहास, सनातन परंपरा तथा वैष्णव बैरागी संत-परंपरा से संबंधित विषयों पर शोध एवं लेखन करते हैं। भारतीय सेना में दीर्घ सैन्य सेवा के बाद उन्होंने अपना समय ऐतिहासिक स्रोतों के अध्ययन, दस्तावेजों के संकलन और शोधपरक लेखन को समर्पित किया है।

उनके लेखन का प्रमुख आधार मूल दस्तावेज, सरकारी अभिलेख, प्रकाशित ऐतिहासिक ग्रंथ, जनगणना सामग्री, न्यायिक अभिलेख तथा अन्य उपलब्ध प्राथमिक और द्वितीयक स्रोत हैं। उनका प्रयास है कि इतिहास संबंधी किसी विषय को प्रस्तुत करते समय प्रमाण और निष्कर्ष के बीच स्पष्ट अंतर रखा जाए।

उनकी पुस्तकों और शोध-लेखों में सनातन परंपरा, अयोध्या, वैष्णव बैरागी परंपरा और भारतीय इतिहास से जुड़े विभिन्न विषयों का अध्ययन मिलता है।

जन्मस्थान: ग्राम रामनगर, गन्नौर, सोनीपत, हरियाणा।

Book Details

Publisher: Sanatan Bharat
Number of Pages: 598
Availability: Available for Download (e-book)

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सनातन अयोध्या खंड–2: रामजन्मभूमि की रक्षा में वैष्णव बैरागी अखाड़ों का योगदान

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