You can access the distribution details by navigating to My pre-printed books > Distribution
सनातन भारत — नया सवेरा का यह 20वाँ अंक (सितंबर 2026) भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा, इतिहास, धर्म, दर्शन, शिक्षा, संस्कार और सामाजिक चिंतन को समर्पित एक विशेष मासिक ई-पत्रिका है।
इस अंक में श्रीराम, रामायण, महाभारत, श्रीमद्भगवद्गीता, स्वर्णप्रस्थ, जगद्गुरु निम्बार्काचार्य, सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा तथा भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विविध विषयों पर सरल, गंभीर और विचारप्रधान सामग्री प्रस्तुत की गई है।
पत्रिका में शिक्षा और संस्कार, नई पीढ़ी की दिशा, परिवार और सामाजिक मूल्यों जैसे समकालीन विषयों पर भी विशेष चिंतन किया गया है। साथ ही “सनातन क्यों जरूरी है?” जैसे महत्वपूर्ण प्रश्न के माध्यम से सनातन को केवल धार्मिक पहचान के रूप में नहीं, बल्कि संस्कृति, जीवन-मूल्यों, कर्तव्य, संस्कार और सामाजिक चेतना की व्यापक दृष्टि से समझने का प्रयास किया गया है।
इस अंक की विशेषता यह है कि इसमें आस्था के साथ शोध और परंपरा के साथ प्रमाण को महत्व दिया गया है। ऐतिहासिक विषयों को समझते समय दस्तावेज, परंपरा, मौखिक इतिहास और उपलब्ध प्रमाणों के बीच अंतर बनाए रखने का प्रयास किया गया है।
सनातन भारत — नया सवेरा का उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और इतिहास के प्रति अध्ययन, जागरूकता, संस्कार और शोध की भावना को बढ़ावा देना है।
यह ई-पत्रिका उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो सनातन संस्कृति, भारतीय इतिहास, वैष्णव परंपरा, बैरागी परंपरा, रामायण, महाभारत, भारतीय दर्शन, शिक्षा और सामाजिक मूल्यों को समझने में रुचि रखते हैं।
संस्थापक एवं संपादक — नरेश दास वैष्णव ‘निम्बार्क’
सेवानिवृत्त नायब सूबेदार (भारतीय सेना)
अंतरराष्ट्रीय लेखक | स्वतंत्र शोधकर्ता | पत्रकार
सनातन वैष्णव बैरागी परंपरा के इतिहासकार
20वाँ अंक | सितंबर 2026
जय श्री राधे राधे।
जय हिंद, जय भारत।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book सनातन भारत — नया सवेरा मासिक ई-पत्रिका | 20वाँ अंक | सितंबर 2026.