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स्वर्णप्रस्थ — आज का सोनीपत — महाभारतकाल का वह गौरवशाली नगर है, जिसका इतिहास 3526 वर्षों पुराना है, परंतु समय के साथ जिसे विस्मृत कर दिया गया।
यह पुस्तक उस पावन भूमि की गाथा है, जिसकी मिट्टी में महाभारत की स्याही मिली है, जिसके कण-कण में श्रीकृष्ण के चरण-चिह्न अंकित हैं। लेखक — सेवानिवृत्त भारतीय सैन्य अधिकारी व इतिहासकार नरेश दास वैष्णव निम्बार्क — ने वर्षों के गहन शोध, प्राचीन स्रोतों के अध्ययन और यात्राओं के माध्यम से स्वर्णप्रस्थ के भुला दिए गए इतिहास को प्रमाणों सहित पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया है।
पुस्तक में शामिल है:
* स्वर्णप्रस्थ की महाभारतकालीन उत्पत्ति व सांस्कृतिक विरासत
* उन पूर्वजों की गाथा जिन्होंने यमुना के पावन तट पर इस नगर की नींव रखी
* पांडवों के स्वाभिमान और संघर्ष से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंग
* सोनीपत के प्राचीन से आधुनिक स्वरूप तक की यात्रा
यह पुस्तक न केवल इतिहास-प्रेमियों के लिए, बल्कि हर उस पाठक के लिए है जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों को प्रमाणों के साथ जानना चाहता है।
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