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आओ , तुम्हें मैँ मीत लिखूँ (eBook)

काव्य संग्रह
Type: e-book
Genre: Romance, Poetry
Language: Hindi
Price: ₹99
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

कविता मनुष्य के अंतर्मन की वह भाषा है जो किसी औपचारिकता या आडंबर की मोहताज नहीं होती। जब कोई भावना मन को गहराई से स्पर्श करती है, जब कोई स्मृति अचानक हृदय के द्वार पर दस्तक देती है, या जब जीवन का कोई अनुभव भीतर एक प्रश्न या अनुभूति जगाता है, तब वही अनुभूति शब्दों में ढलकर कविता बन जाती है। इस काव्य-संग्रह की रचनाएँ भी जीवन के ऐसे ही अनेक क्षणों से जन्मी हैं। कभी प्रेम की कोमलता से, कभी विरह की हल्की पीड़ा से, कभी प्रकृति की मधुरता से और कभी समय और देश काल की परिस्थितियों की विडंबनाओं से।

इस संग्रह का शीर्षक “आओ, तुम्हें मैं मीत लिखूँ” अपने भीतर एक विशेष भावात्मक संसार को समेटे हुए है। यहाँ “मीत” केवल किसी एक व्यक्ति का संकेत नहीं है; वह आत्मीयता, विश्वास और मानवीय संबंधों की उस गहराई का प्रतीक है जो मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती है। मीत वह होता है जो हमारे सुख-दुख में सहभागी बनता है, जो हमारे मौन को भी समझने की क्षमता रखता है, और जो हमारे जीवन की यात्रा में हमारे साथ चलने का विश्वास देता है। जब कवि कहता है, “आओ, तुम्हें मैं मीत लिखूँ”, तो वह वस्तुतः अपने शब्दों के माध्यम से उस आत्मीयता को रचने का प्रयास करता है जो जीवन को अधिक मानवीय और अधिक खूबसूरत बनाती है।

इस काव्य-संग्रह की कविताएँ जीवन के अनेक रंगों को समेटने का प्रयास करती हैं। कहीं प्रेम की सहज मुस्कान है, कहीं स्मृतियों की हल्की आहट। कहीं मन की बेचैनी है, तो कहीं उम्मीद की एक उजली किरण। जीवन के ये छोटे-छोटे पल ही वास्तव में हमारी संवेदनाओं का आधार बनते हैं। अक्सर वही पल, जो देखने में बहुत साधारण लगते हैं, हमारे भीतर सबसे गहरी छाप छोड़ जाते हैं। मैंने इन्हीं खूबसूरत पलों को शब्दों में सँजोने का प्रयास किया है।

इस संग्रह की अनेक कविताओं में प्रकृति भी एक महत्त्वपूर्ण उपस्थिति के रूप में दिखाई देती है। आकाश की विशालता, चाँद की शीतलता, हवाओं की सरसराहट, ऋतुओं का परिवर्तन, ये सब मेरी कविताओं में कवि के मन के साथ जैसे संवाद करते हुए प्रतीत होते हैं। प्रकृति केवल दृश्य नहीं है; वह मनुष्य की संवेदनाओं का एक विस्तार भी है। कई बार मनुष्य अपने भीतर की भावनाओं को प्रकृति के माध्यम से अधिक सहजता से व्यक्त कर पाता है। इसलिए इस काव्य-संग्रह में प्रकृति और मनुष्य के भाव एक-दूसरे के साथ घुलते-मिलते दिखाई देते हैं।

About the Author

नवल किशोर सोनी
माता-पिता : स्व.श्रीमती कमला देवी, स्व. श्री लड्डू लाल सोनी
जन्म: 10 नवम्बर 1974, माँगरोल, जिला बारां, राजस्थान
जीवन संगिनी: श्रीमती मंजू सोनी (प्राध्यापिका, राजकीय सीनियर माध्यमिक विद्यालय, अजमेर)
पुत्री: नव्या सोनी (अध्ययनरत)
शिक्षा: M.A. B.Ed, LL.B & MSW
सामाजिक सरोकारों से विशेष जुड़ाव। साहित्य कलाओं में अभिरुचि। बोधि प्रकाशन, जयपुर से निराशाओं के पार काव्य संग्रह (2022) प्रकाशित, अर्पिता : एक देवदासी (उपन्यास) प्रकाशित, रिश्ता तेरा मेरा (दो न्यायाधीशों की प्रेम कहानी), उपन्यास (2026) प्रकाशित, कहानियों के आईने में जीवन कौशल (21वीं सदी के जीवन कौशलों पर आधारित कहानियाँ) पुस्तक प्रकाशित, शिक्षा में सुधार : चुनौतियाँ एवं संभावनाएं -पुस्तक प्रकाशित (2026)। आओ, तुम्हें मैं मीत लिखूँ (काव्य संग्रह) प्रकाशित, कविता, कहानी एवं समसामयिक विषयों पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर लेखन।
'शिक्षा विमर्श' पत्रिका में शिक्षा पर विभिन्न आलेख प्रकाशित। प्रतिलिपि ऐप पर निरंतर कविताएँ, कहानियाँ और लेख प्रकाशित होते हैं। शिक्षा और कानून से जुड़े मुद्दों पर संवाद और लेखन में रुचि। शिक्षा के माध्यम से बदलाव हेतु प्रयासरत।
यूनिसेफ, ऑक्सफेम, केयर इण्डिया, दिगंतर, सेव द चिल्ड्रन जैसी संस्थाओं के साथ जुड़कर विभिन्न शैक्षिक परियोजनाओं के संचालन में सहयोग। समता शिक्षा समिति, शैक्षिक सरोकार मंच और तार्किक दुनिया के संस्थापक।
वर्तमान में बालिका शिक्षा के लिए कार्यरत रमन मैग्सेसे अवॉर्डी संस्था एजुकेट गर्ल्स के लिए शिक्षाक्रम, पाठ्यक्रम और विषयवस्तु निर्माण के कार्य में संलग्न ।
सम्पर्क : मकान नंबर-15, विनायक विहार
गणपतपुरा, मानसरोवर,जयपुर 302020
ई-मेल navalkishor.s@gmail.com

Book Details

Publisher: Naval Kishor Soni
Number of Pages: 158
Availability: Available for Download (e-book)

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