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आवाज़ दी उसने (eBook)

जहाँ खामोशी भी आवाज़ बन जाती है
Type: e-book
Genre: Literature & Fiction, Horror
Language: Hindi
Price: ₹99
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

“आवाज़ दी उसने” कहानी सिर्फ़ रंजना या सुचित्रा की नहीं, बल्कि हर पाठक को सम्बोधित करती है। क्योंकि हर किसी के जीवन में कोई न कोई अनसुनी आवाज़ होती है। कभी किसी खोए हुए रिश्ते की, कभी किसी अपूर्ण सपने की, कभी अपने ही भीतर के बच्चे की। जब पाठक इस कहानी को पढ़ेंगे, तो उन्हें कहीं न कहीं अपनी ही गूँज सुनाई देगी। वो गूँज जो कहेगी, “क्या तुमने मुझे सच में सुना था?”
“आवाज़ दी उसने” डराती है, पर साथ ही सोचने पर मजबूर भी करती है। यह कहानी भय और करुणा का ऐसा संगम है, जहाँ भूत का रुपक कोई बाहरी शक्ति नहीं, बल्कि भीतर की अनुत्तरदायित्व की छाया है। यह कहानी पारंपरिक हॉरर नहीं है, बल्कि आधुनिक सामाजिक हॉरर है जहाँ अपराध पुलिस की फाइलों में नहीं, बल्कि इंसान की असंवेदनशीलता में दफन है। इसमें सस्पेंस है, पर साथ ही दर्शन भी। डर है, पर साथ में दया की पुकार भी। और यही इसका जादू है कि पाठक डरते हुए भी आगे पढ़ना चाहता है।
रंजना की डायरी में आख़िरी शब्द थे, “वो अब मुझसे बात नहीं करती, क्योंकि मैंने उसे मुक्त कर दिया है…।” पर क्या वह सच में मुक्त हुई थी ? या वह आवाज़ अब किसी और के डिवाइस में बस गई थी ? कहानी यहीं से शुरू होती है जहाँ शांति दिखती है, पर भीतर तूफ़ान पलता है।
इस कहानी को लिखने का विचार मैंने अपने पाठकों की मांग पर बनाया। वे चाहते थे एक ऐसी कहानी, जिसमें डर, रहस्य और संवेदना एक साथ बहें। मैंने जाना कि असली रोमांच वही है,जहाँ पाठक को सिर्फ़ चौंकाया नहीं, बल्कि भीतर तक झकझोरा जाए।
“आवाज़ दी उसने” उसी झंझावात का परिणाम है। यह कहानी डर के साथ-साथ मनुष्यत्व की पुनर्प्राप्ति का प्रयास है। क्योंकि जब हम सुनना भूल जाते हैं, तो हमारा अंतःकरण या आत्मा ही हमें पुकारते हैं और कभी-कभी वह पुकार इतनी गहरी होती है कि दीवारें भी जवाब देती हैं। “आवाज़ दी उसने” कहानी कभी समाप्त नहीं होती क्योंकि डर अभी शुरू हुआ है। वो अब केवल स्कूल की दीवारों तक सीमित नहीं रहेगा। वो डिजिटल सिस्टम, ऑनलाइन नेटवर्क, यहाँ तक कि पाठक के अपने मोबाइल में भी प्रवेश करेगा। क्योंकि जब कोई कहानी “आवाज़” बन जाती है, तो वह सिर्फ़ पढ़ी नहीं जाती,वह सुनी भी जाती है। क्या आप सुनने के लिए तैयार हैं ?
क्योंकि “आवाज़ दी उसने..” कहानी आम तौर पर लिखी जाने वाली हॉरर कहानियों से भिन्न जरूर है पर उम्मीद है कि यह कहानी आपके अंतःकरण (जिसे यहां आत्मा कहा गया है) झकझोरने में सफल होगी।

About the Author

नवल किशोर सोनी
माता-पिता : स्व.श्रीमती कमला देवी, स्व. श्री लड्डू लाल सोनी
जन्म: 10 नवम्बर 1974, माँगरोल, जिला बारां, राजस्थान
जीवन संगिनी: श्रीमती मंजू सोनी (प्राध्यापिका, राजकीय सीनियर माध्यमिक विद्यालय, अजमेर)
पुत्री: नव्या सोनी (अध्ययनरत)
शिक्षा: एम.ए., बी.एड़., एल.एल.बी., एम.एस.डब्ल्यू.(समाज कार्य में स्नातकोत्तर)
सामाजिक सरोकारों से विशेष जुड़ाव। साहित्य कलाओं में अभिरुचि। समाज कार्य हेतु समस्त अंग एवं देह दान का संकल्प।
बोधि प्रकाशन, जयपुर से निराशाओं के पार काव्य संग्रह (2022) प्रकाशित, अर्पिता : एक देवदासी (उपन्यास) प्रकाशित, रिश्ता तेरा मेरा (दो न्यायाधीशों की प्रेम कहानी), उपन्यास (2026) प्रकाशित, कहानियों के आईने में जीवन कौशल (21वीं सदी के जीवन कौशलों पर आधारित कहानियाँ) पुस्तक प्रकाशित, शिक्षा में सुधार : चुनौतियाँ एवं संभावनाएं -पुस्तक प्रकाशित (2026)। शहर,स्पा और चंचल (देह एक, ज़ख्म अनेक) उपन्यास, आओ, तुम्हें मैं मीत लिखूँ (काव्य संग्रह) प्रकाशित, कविता, कहानी एवं समसामयिक विषयों पर विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में निरन्तर लेखन। 'शिक्षा विमर्श' पत्रिका में शिक्षा पर विभिन्न आलेख प्रकाशित। प्रतिलिपि एप पर निरंतर कविताएँ, कहानियाँ और लेख प्रकाशित। शिक्षा और कानून से जुड़े मुद्दों पर संवाद और लेखन में रुचि। शिक्षा के माध्यम से बदलाव हेतु प्रयासरत।
यूनिसेफ, ऑक्सफेम, केयर इण्डिया, दिगंतर, सेव द चिल्ड्रन जैसी संस्थाओं के साथ जुड़कर विभिन्न शैक्षिक परियोजनाओं के संचालन में सहयोग। समता शिक्षा समिति, शैक्षिक सरोकार मंच और तार्किक दुनिया के संस्थापक।
वर्तमान में बालिका शिक्षा के लिए कार्यरत रमन मैग्सेसे अवॉर्डी संस्था एजुकेट गर्ल्स के लिए शिक्षाक्रम, पाठ्यक्रम और विषयवस्तु निर्माण के कार्य में संलग्न ।
सम्पर्क : मकान नंबर-15, विनायक विहार
गणपतपुरा, मानसरोवर,जयपुर 302020
ई-मेल navalkishor.s@gmail.com

Book Details

Publisher: Naval Kishor Soni
Number of Pages: 268
Availability: Available for Download (e-book)

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