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**"अब तू दिखती नहीं – भाग–१"** एक सच्ची भावनाओं से बुनी गई साहित्यिक प्रेमकथा है, जिसमें प्रेम केवल दो दिलों का मिलन नहीं, बल्कि विश्वास, त्याग, संघर्ष, प्रतीक्षा और सामाजिक बंधनों से जूझते दो मासूम जीवनों की कहानी है।
यह उपन्यास पाठकों को शुभम, सुधी, नयन और सोनी की उस दुनिया में ले जाता है, जहाँ सपने हैं, संघर्ष है, पढ़ाई है, परिवार है और सबसे बढ़कर एक ऐसा प्रेम है, जो हर कठिनाई के बाद भी अपने अस्तित्व को बचाए रखने का प्रयास करता है।
आर्थिक तंगी, सामाजिक मर्यादाएँ, परिवार की ज़िम्मेदारियाँ और भविष्य की चिंताएँ—इन सबके बीच जन्म लेने वाला यह प्रेम कई बार मुस्कुराता है, कई बार टूटता है, फिर भी हार नहीं मानता।
इस भाग में आप देखेंगे कि कैसे दो प्रेम कहानियाँ धीरे-धीरे आकार लेती हैं। कहीं पहली मुस्कान है, कहीं पहली बातचीत, कहीं घंटों का इंतज़ार, तो कहीं एक फ़ोन कॉल ही पूरी दुनिया बन जाता है। लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता है, परिस्थितियाँ बदलने लगती हैं और प्रेम की राह आसान नहीं रह जाती।
यह पुस्तक केवल प्रेमियों के लिए नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए है जिन्होंने कभी किसी अपने के लिए इंतज़ार किया हो, किसी को खोने का डर महसूस किया हो या बिना किसी स्वार्थ के किसी से सच्चा प्रेम किया हो।
यदि आपको भावनात्मक, साहित्यिक और हृदय को स्पर्श करने वाले उपन्यास पढ़ना पसंद है, तो **"अब तू दिखती नहीं – भाग–१"** आपको अंत तक अपने साथ बाँधे रखेगा।
यह केवल एक कहानी नहीं, बल्कि प्रेम, विरह, आशा और मानवीय संवेदनाओं की ऐसी यात्रा है, जिसका प्रत्येक अध्याय पाठक के हृदय में एक अमिट छाप छोड़ जाएगा।
**कहानी अभी शुरू हुई है...**
**मिलन, विरह और प्रेम की वास्तविक परीक्षा अभी शेष है।**
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