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AB TU DIKHATI NHI BHAG-1 (eBook)

TERA PREM PANE KI CHAH
Type: e-book
Genre: Literature & Fiction
Language: Hindi
Price: ₹69
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

**"अब तू दिखती नहीं – भाग–१"** एक सच्ची भावनाओं से बुनी गई साहित्यिक प्रेमकथा है, जिसमें प्रेम केवल दो दिलों का मिलन नहीं, बल्कि विश्वास, त्याग, संघर्ष, प्रतीक्षा और सामाजिक बंधनों से जूझते दो मासूम जीवनों की कहानी है।

यह उपन्यास पाठकों को शुभम, सुधी, नयन और सोनी की उस दुनिया में ले जाता है, जहाँ सपने हैं, संघर्ष है, पढ़ाई है, परिवार है और सबसे बढ़कर एक ऐसा प्रेम है, जो हर कठिनाई के बाद भी अपने अस्तित्व को बचाए रखने का प्रयास करता है।

आर्थिक तंगी, सामाजिक मर्यादाएँ, परिवार की ज़िम्मेदारियाँ और भविष्य की चिंताएँ—इन सबके बीच जन्म लेने वाला यह प्रेम कई बार मुस्कुराता है, कई बार टूटता है, फिर भी हार नहीं मानता।

इस भाग में आप देखेंगे कि कैसे दो प्रेम कहानियाँ धीरे-धीरे आकार लेती हैं। कहीं पहली मुस्कान है, कहीं पहली बातचीत, कहीं घंटों का इंतज़ार, तो कहीं एक फ़ोन कॉल ही पूरी दुनिया बन जाता है। लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ता है, परिस्थितियाँ बदलने लगती हैं और प्रेम की राह आसान नहीं रह जाती।

यह पुस्तक केवल प्रेमियों के लिए नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए है जिन्होंने कभी किसी अपने के लिए इंतज़ार किया हो, किसी को खोने का डर महसूस किया हो या बिना किसी स्वार्थ के किसी से सच्चा प्रेम किया हो।

यदि आपको भावनात्मक, साहित्यिक और हृदय को स्पर्श करने वाले उपन्यास पढ़ना पसंद है, तो **"अब तू दिखती नहीं – भाग–१"** आपको अंत तक अपने साथ बाँधे रखेगा।

यह केवल एक कहानी नहीं, बल्कि प्रेम, विरह, आशा और मानवीय संवेदनाओं की ऐसी यात्रा है, जिसका प्रत्येक अध्याय पाठक के हृदय में एक अमिट छाप छोड़ जाएगा।

**कहानी अभी शुरू हुई है...**

**मिलन, विरह और प्रेम की वास्तविक परीक्षा अभी शेष है।**

About the Author

**नितिन कुमार** समकालीन हिंदी साहित्य के उभरते हुए युवा लेखक हैं। सरल भाषा, गहरी संवेदनाएँ और मानवीय रिश्तों की वास्तविक अनुभूतियाँ उनकी लेखनी की सबसे बड़ी विशेषता हैं। उनके लेखन में प्रेम केवल आकर्षण नहीं, बल्कि समर्पण, त्याग, संघर्ष, प्रतीक्षा और जीवन की वास्तविकताओं का दर्पण बनकर उभरता है।

एक साधारण ग्रामीण परिवेश से आने वाले लेखक ने जीवन के संघर्षों, सामाजिक परिस्थितियों और मानवीय भावनाओं को निकट से अनुभव किया है। इन्हीं अनुभवों ने उनकी लेखनी को वह संवेदनशीलता प्रदान की है, जो पाठकों के हृदय तक सीधे पहुँचती है।

**"अब तू दिखती नहीं"** तथा **"तुझे देखने को तरसा"** जैसी साहित्यिक प्रेमकथाओं के माध्यम से लेखक ने प्रेम, विरह, सामाजिक बंधनों, शिक्षा, संघर्ष और उम्मीद को अत्यंत भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया है। उनकी रचनाओं का उद्देश्य केवल प्रेम कहानियाँ कहना नहीं, बल्कि उन अनगिनत अधूरी भावनाओं को शब्द देना है जो समय और समाज के बीच कहीं खो जाती हैं।

### **लेखक की प्रकाशित कृतियाँ**

* **तुझे देखने को तरसा – भाग–१**
* **तुझे देखने को तरसा – भाग–२**
* **अब तू दिखती नहीं – भाग–१**
* **अब तू दिखती नहीं – भाग–२**

लेखक का विश्वास है—

**"सच्चा प्रेम कभी समाप्त नहीं होता; समय केवल मिलने वालों की परीक्षा लेता है और बिछड़ने वालों की प्रतीक्षा को अमर कर देता है।"**

आप अपने सुझाव, प्रतिक्रिया एवं शुभकामनाएँ लेखक तक सोशल मीडिया के माध्यम से पहुँचा सकते हैं।

**लेखक:** **नितिन कुमार**

Book Details

Publisher: NITIN KUMAR
Number of Pages: 190
Availability: Available for Download (e-book)

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AB TU DIKHATI NHI BHAG-1

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