Description
तुझे देखने को तरसा – आखिर गुनाह किसका था?
क्या हर अधूरी प्रेम कहानी में गलती किसी एक की होती है?
यह केवल एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि टूटे हुए भरोसे, बिछड़ते रिश्तों, गहरे दर्द और अंतहीन इंतज़ार की भावनात्मक यात्रा है। जब प्यार सच्चा हो, फिर भी दूरियाँ बढ़ जाएँ, तो दिल बार-बार यही सवाल पूछता है—आखिर गुनाह किसका था?
इस उपन्यास का हर अध्याय आपको प्रेम, पीड़ा, यादों और उन अनकहे जज़्बातों से रूबरू कराएगा जिन्हें शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता। अगर आपने कभी किसी को दिल से चाहा है, किसी के इंतज़ार में रातें गुज़ारी हैं, या किसी अपने को खोने का दर्द महसूस किया है, तो यह कहानी आपको अपने जीवन का एक हिस्सा लगेगी।
"तुझे देखने को तरसा – आखिर गुनाह किसका था?" एक ऐसी भावनात्मक और रहस्यमयी कहानी है, जो आखिरी पन्ने तक आपको अपने साथ बाँधे रखेगी।
लेखक: नितिन कुमार
लेखक परिचय
नितिन कुमार समकालीन हिंदी साहित्य के उभरते हुए युवा उपन्यासकार हैं। उनकी लेखनी वास्तविक जीवन के अनुभवों, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक यथार्थ से प्रेरित है। वे प्रेम को केवल दो व्यक्तियों के आकर्षण के रूप में नहीं, बल्कि विश्वास, त्याग, प्रतीक्षा, संघर्ष और आत्मसम्मान की एक गहन अनुभूति के रूप में प्रस्तुत करते हैं। उनकी रचनाओं में समाज की अनेक विसंगतियाँ—जैसे जाति-भेद, छुआछूत, सामाजिक रूढ़ियाँ, पारिवारिक दबाव और मानवीय संबंधों की जटिलताएँ—साहित्यिक शैली में जीवंत होकर पाठकों के सामने आती हैं।
उनकी पहली प्रकाशित कृति "तुझे देखने को तरसा – तड़प, बेचैनी और इंतज़ार की दास्तान" एक ऐसी प्रेमगाथा है, जो केवल प्रेम का वर्णन नहीं करती, बल्कि एक ऐसे युवक की पीड़ा, मौन, प्रतीक्षा और उस अनुत्तरित प्रश्न को सामने रखती है जिसने उसके पूरे जीवन की दिशा बदल दी—"आख़िर शुभम का गुनाह क्या था?"
लेखक की आगामी कृति "अब तू दिखती नहीं" उसी कथा का विस्तार है। इस उपन्यास में पहले भाग के अनकहे रहस्यों, अधूरे प्रश्नों और छिपे हुए सत्यों से पर्दा उठेगा। सोनी की प्रेमयात्रा, सुधी के आरोपों का वास्तविक कारण, शुभम के जीवन के अनदेखे अध्याय तथा समाज की कठोर सच्चाइयाँ इस उपन्यास की मुख्य धुरी हैं। यह केवल एक प्रेमकथा नहीं, बल्कि सत्य, अपराध, आत्मसम्मान, सामाजिक संघर्ष और मानवीय भावनाओं की गहन खोज है।
लेखक का विश्वास है कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज का दर्पण और आत्मा का संवाद है। उनकी प्रत्येक रचना पाठकों को केवल कहानी पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि पात्रों के साथ जीने, उनके दर्द को महसूस करने और अंत तक सत्य की खोज में बने रहने के लिए प्रेरित करती है।
प्रकाशित कृतियाँ
तुझे देखने को तरसा (उपन्यास)
अब तू दिखती नहीं (उपन्यास)
— नितिन कुमार