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भारतीय सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, समाज, इतिहास, संगीत, कला और भावनाओं का जीवंत प्रतिबिंब है। सौ वर्षों से अधिक की इस अद्भुत यात्रा में भारतीय फिल्मों ने न केवल देश के करोड़ों दर्शकों का दिल जीता है, बल्कि विश्व स्तर पर भी अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।
यह पुस्तक भारतीय सिनेमा के जन्म से लेकर आधुनिक डिजिटल और OTT युग तक के विकास को सरल, रोचक और व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करती है। इसमें मूक फिल्मों के दौर, दादासाहेब फाल्के के योगदान, स्वर्णिम युग, महान फिल्मकारों और कलाकारों, क्षेत्रीय सिनेमा, समानांतर सिनेमा, बॉलीवुड, तकनीकी क्रांति, पैन-इंडिया फिल्मों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और भविष्य की संभावनाओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
यदि आप भारतीय सिनेमा के इतिहास को समझना चाहते हैं, उसके विकास की कहानी जानना चाहते हैं और भविष्य की दिशा को पहचानना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका है।
यह पुस्तक विशेष रूप से सिनेमा प्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, फिल्म अध्ययन के पाठकों और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले सभी पाठकों के लिए उपयोगी है।
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