You can access the distribution details by navigating to My pre-printed books > Distribution

Add a Review

प्रकृति, पशु और मनुष्य: एक दार्शनिक विश्लेषण (eBook)

“सभ्यता, चेतना और संतुलन की पुनर्व्याख्या”
Type: e-book
Genre: Philosophy
Language: Hindi
Price: ₹49
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

“प्रकृति, पशु और मनुष्य: एक दार्शनिक विश्लेषण”
सभ्यता, चेतना और संतुलन की पुनर्व्याख्या

क्या मनुष्य वास्तव में विकास के शिखर पर है, या वह संतुलन से दूर होता जा रहा है?
क्या सभ्यता ने हमें स्वतंत्र बनाया है, या एक नए प्रकार के बंधन में बाँध दिया है?

यह पुस्तक मनुष्य, पशु और प्रकृति के बीच संबंधों को एक नई दृष्टि से समझने का प्रयास है। यह केवल एक विचार नहीं, बल्कि एक गहन बौद्धिक यात्रा है, जिसमें वैज्ञानिक तथ्यों और दार्शनिक चिंतन को एक साथ प्रस्तुत किया गया है।

पुस्तक यह दिखाती है कि जहाँ पशु अपने जीवन को प्रकृति के संतुलन में जीते हैं, वहीं मनुष्य अपनी चेतना और अहंकार के कारण उस संतुलन से दूर होता चला गया है। विकास, तकनीक और आधुनिक जीवन की सुविधाओं ने जहाँ एक ओर हमें शक्ति दी है, वहीं दूसरी ओर उन्होंने प्रकृति के साथ हमारे संबंध को जटिल बना दिया है।

इस पुस्तक में विकासवाद, पारिस्थितिकी, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन जैसे वैज्ञानिक विषयों के साथ-साथ चेतना, अहंकार, स्वतंत्रता और सभ्यता जैसे दार्शनिक प्रश्नों को गहराई से समझाया गया है। यह एक ऐसा प्रयास है जो यह जानने की कोशिश करता है कि क्या मनुष्य अपनी बुद्धि का उपयोग केवल नियंत्रण के लिए करेगा, या वह इसे संतुलन और सह-अस्तित्व की दिशा में भी ले जा सकता है।

यह पुस्तक किसी निष्कर्ष को थोपती नहीं, बल्कि पाठक को सोचने के लिए प्रेरित करती है—
क्या हम अपने जीवन को इस प्रकार बदल सकते हैं कि हम प्रकृति के लिए एक समस्या नहीं, बल्कि समाधान का हिस्सा बन सकें?

About the Author

राकेश कुमार अहिरवार एक शोधार्थी और शिक्षक हैं, जिनकी रुचि भौतिकी, विशेष रूप से ठोस अवस्था भौतिकी (Condensed Matter Physics) और प्रथम सिद्धांत (DFT) आधारित अध्ययनों में है। वे पूर्ण ह्यूसलर मिश्रधातुओं (Full Heusler Alloys) के संरचनात्मक, इलेक्ट्रॉनिक, ऊष्मागतिक तथा थर्मोइलेक्ट्रिक गुणों पर शोध कार्य कर रहे हैं।
वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ-साथ उनकी गहरी रुचि दार्शनिक चिंतन में भी है। वे जीवन, चेतना, प्रकृति और मानव सभ्यता के बीच संबंधों को समझने और उन्हें एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं।
यह पुस्तक उनके इसी प्रयास का परिणाम है, जिसमें उन्होंने वैज्ञानिक तथ्यों और दार्शनिक विचारों को एक साथ जोड़कर यह समझने का प्रयास किया है कि मनुष्य और प्रकृति के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जा सकता है।
उनका मानना है कि विज्ञान केवल बाहरी दुनिया को समझने का माध्यम नहीं, बल्कि यह आत्म-चिंतन और जीवन के गहरे प्रश्नों को समझने का भी एक महत्वपूर्ण साधन है।

Book Details

Publisher: self publication
Number of Pages: 76
Availability: Available for Download (e-book)

Ratings & Reviews

प्रकृति, पशु और मनुष्य: एक दार्शनिक विश्लेषण

प्रकृति, पशु और मनुष्य: एक दार्शनिक विश्लेषण

(Not Available)

Review This Book

Write your thoughts about this book.

Currently there are no reviews available for this book.

Be the first one to write a review for the book प्रकृति, पशु और मनुष्य: एक दार्शनिक विश्लेषण.

Other Books in Philosophy

Shop with confidence

Safe and secured checkout, payments powered by Razorpay. Pay with Credit/Debit Cards, Net Banking, Wallets, UPI or via bank account transfer and Cheque/DD. Payment Option FAQs.