You can access the distribution details by navigating to My pre-printed books > Distribution

Add a Review

"संचिता – विरह की बारह कविता" (eBook)

Type: e-book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹249
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

"संचिता – विरह की बारह कविता" एक भावनात्मक काव्य संग्रह है, जिसमें वर्ष के बारह महीनों के माध्यम से विरह की पीड़ा, प्रेम की गहराई और स्मृतियों की नमी को व्यक्त किया गया हैं।
हर कविता एक अलग एहसास है— कभी-उम्मीद, कभी-दर्द, कभी-यादों की बारिश।
यह पुस्तक समर्पित है—
उन सभी दिलों को,
जो प्रेम में टूटे नहीं,
बल्कि गहराए हैं…
और उन आत्माओं को,
जो विरह में भी
अपने अस्तित्व को खोजती रहीं।
यह पुस्तक उन सभी के लिए है जिन्होंने कभी किसी को सच्चे दिल से चाहा है।
विरह केवल दूरी नहीं है,
यह एक ऐसी अवस्था है जहाँ आत्मा
अपने सबसे गहरे स्वरूप से मिलती है।

About the Author

राकेश कुमार अहिरवार एक समर्पित शोधार्थी (Research Scholar) हैं, जो भौतिकी के गहन और जटिल विषयों—विशेष रूप से Heusler alloys, electronic structure, तथा thermoelectric properties—पर कार्य कर रहे हैं। उनका शोध कार्य आधुनिक विज्ञान के उन पहलुओं को समझने की दिशा में है, जो ऊर्जा, पदार्थ और उनके सूक्ष्म व्यवहार के बीच के संबंधों को उजागर करते हैं। विज्ञान की कठोर तर्कशीलता के बीच भी,
उनका मन संवेदनाओं की एक अलग ही दुनिया में विचरण करता है। लेखन उनके लिए केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मा की वह भाषा है, जिसके माध्यम से वे अपने अनुभवों, भावनाओं और जीवन के गहरे सत्य को शब्दों में ढालते हैं। “संचिता – विरह की बारह कविता” केवल कविताओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी आंतरिक यात्रा का प्रतिबिंब है, जिसमें प्रेम, पीड़ा, तन्हाई और आत्म-खोज एक साथ प्रवाहित होते हैं। उनकी रचनाओं में एक ओर जहाँ भावनाओं की कोमलता है, वहीं दूसरी ओर एक दार्शनिक गहराई भी है, जो पाठक को स्वयं के भीतर झांकने के लिए प्रेरित करती है। राकेश का मानना है कि विरह केवल खोने का अनुभव नहीं, बल्कि स्वयं को पाने की प्रक्रिया भी है। उनकी लेखनी उसी खोज का परिणाम है— एक ऐसी खोज, जो विज्ञान और संवेदना, दोनों के बीच एक अद्भुत संतुलन स्थापित करती है।

Book Details

Number of Pages: 19
Availability: Available for Download (e-book)

Ratings & Reviews

"संचिता – विरह की बारह कविता"

"संचिता – विरह की बारह कविता"

(Not Available)

Review This Book

Write your thoughts about this book.

Currently there are no reviews available for this book.

Be the first one to write a review for the book "संचिता – विरह की बारह कविता".

Other Books in Poetry

Shop with confidence

Safe and secured checkout, payments powered by Razorpay. Pay with Credit/Debit Cards, Net Banking, Wallets, UPI or via bank account transfer and Cheque/DD. Payment Option FAQs.