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"संचिता – विरह की बारह कविता" एक भावनात्मक काव्य संग्रह है, जिसमें वर्ष के बारह महीनों के माध्यम से विरह की पीड़ा, प्रेम की गहराई और स्मृतियों की नमी को व्यक्त किया गया हैं।
हर कविता एक अलग एहसास है— कभी-उम्मीद, कभी-दर्द, कभी-यादों की बारिश।
यह पुस्तक समर्पित है—
उन सभी दिलों को,
जो प्रेम में टूटे नहीं,
बल्कि गहराए हैं…
और उन आत्माओं को,
जो विरह में भी
अपने अस्तित्व को खोजती रहीं।
यह पुस्तक उन सभी के लिए है जिन्होंने कभी किसी को सच्चे दिल से चाहा है।
विरह केवल दूरी नहीं है,
यह एक ऐसी अवस्था है जहाँ आत्मा
अपने सबसे गहरे स्वरूप से मिलती है।
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