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Type: e-book
Genre: Philosophy
Language: Hindi
Price: ₹0
Available Formats: PDF, EPUB

Description

कुज्जिका मतलब गाइड अर्थात मार्गदर्शक होता है। इस पुस्तक में लिखी गई कहानियां हमारा मार्गदर्शन करती हैं‌। हमें किस प्रकार से नैतिक मूल्य और संस्कारों को महत्व देना चाहिए इसके साथ ही जीवन की मूलभूत बातें भी सिखाती हैं।
जिस प्रकार एक पिता अपनी पुत्री को आसानी से जीवन जीना सिखा देते हैं किस प्रकार से घर गृहस्थी को चलाया जाता है, किस प्रकार से गरीब के साथ निष्पक्ष न्याय किया जा सकता है, हमें शारीरिक श्रम करते रहना चाहिए ताकि हमारे शरीर के अंगों को जंग ना लगे, किस प्रकार से कर्तृत्व का अभिमानी नहीं होना चाहिए, किस प्रकार विपरीत परिस्थितियों में अपने को परेशान होने से बचाया जा सकता है, किस प्रकार पुत्र और पुत्री में न्याय पूर्वक धन का बंटवारा होना चाहिए, किस प्रकार हमें अपने कर्मों को ईश्वर के कर्म समझ कर करना चाहिए इस प्रकार की अनेक मूलभूत बातें हमें इस पुस्तक में सीखने को मिलती है और वह भी रोचक तरीके से।

हमारा प्रयास है इन छोटी-छोटी कहानियों को आप तक पहुंचाना। पाठकों की सराहना ही हमारे प्रयास की सफलता है।

About the Authors

मैंने रश्मि मुरारी जोशी (एम ए पॉलिटिकल साइंस) अपनी देवरानी श्रीमती कृष्णा दिवाकर शर्मा के साथ मिलकर कुंजिका पुरानी कहानियों की नई संरचना कर आप तक पहुंचाने का प्रयास किया है सच में तो मैं यह नहीं कहती कि मैंने किया है मेरी कलम चल पड़ी किसी अंजान शक्ति की प्रेरणा से शायद ईश्वर ने ही मुझे इसका निमित्त बनाया हो, उन्हीं की प्रेरणा से यह कुंजिका हम आप तक पहुंचा पाए हैं।

मैं कृष्णा दिवाकर शर्मा (एल.एल.बी) , आज जो कुछ भी हूँ अपने माता-पिता के आशिर्वाद से हूँ। माँ (गृहणी) ने समय-समय पर उचित शिक्षा हमें दी - कभी कहानियों के द्वारा ओर कभी उदाहरण देदे कर। वहीं मेरे पिताजी (उद्योगपति) ने प्रतिपल मुझे साहस दिया एवं जीवन को सहजता से जीना सिखाया। मेरे पति एक अच्छे व्यापारी ओर कर्मठ व्यक्तित्व के इंसान है। जब भी मौका मिलता तो मैं सभी को वे सारी कहानियाँ सुनाने लग जाती। जीवन मे इनका अनुसरण कर, मैं अपने जीवन की नौका को सहजता से पार लेजा पा रही हूँ ।इन्हीं कहानियों को आधार रखकर नई कहानियों की संरचना की गई हैं। इसमे मेरी जेठानी श्रीमति रश्मी मुरारीलाल जोशी का बहुत ही सहयोग रहा है। उन्ही की प्रेरणा से माँ की कहानियों ने कुज्जिका का रूप लिया है।

Book Details

Publisher: Rashmi Joshi
Number of Pages: 156
Availability: Available for Download (e-book)

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कुज्जिका

कुज्जिका

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