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एक प्रेम… दो देश… और अनगिनत दूरियाँ…
कुछ मुलाक़ातें एक छोटी-सी टिप्पणी से शुरू होती हैं। लेकिन कभी-कभी वही छोटी-सी शुरुआत दो ज़िंदगियों को हमेशा के लिए बदल देती है।
केरल के राशिद और ट्यूनीशिया की ज़िया की मुलाक़ात भी कुछ ऐसी ही थी। उनके बीच हज़ारों किलोमीटर की दूरी थी। अलग-अलग देश, अलग-अलग परिस्थितियाँ, अलग-अलग दुनिया… फिर भी, धीरे-धीरे बढ़ती उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई।
लेकिन क्या दूर रहकर किसी से प्यार करना इतना आसान होता है?
समय के अंतर के बीच भेजे गए संदेश, जवाब का इंतज़ार करते पल, कहने से झिझकती भावनाएँ और साथ रहने के सपने… इन सबके बीच उनके रिश्ते को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
जब वे एक-दूसरे से आमने-सामने मिलने की उम्मीद में इंतज़ार करते हैं, तो क्या प्यार उन्हें एक कर पाएगा? या कुछ दूरियाँ पूरी ज़िंदगी दूरियाँ ही बनकर रह जाएँगी?
एक अंतरराष्ट्रीय प्रेम कहानी सीमाओं के पार पनपते प्यार, इंतज़ार और उम्मीद की कहानी है। यह कहानी याद दिलाती है कि किसी से प्यार करने का मतलब सिर्फ़ उसके साथ रहना ही नहीं होता, बल्कि कभी-कभी दूर रहकर भी किसी की ज़िंदगी का हिस्सा बना जा सकता है।
क्योंकि नक्शों पर दिखाई देने वाली दूरियों से परे कुछ रिश्ते पनपते हैं… और शब्दों से परे भी कुछ प्रेम कहानियाँ ज़िंदा रहती हैं।
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