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SWARGAROHAN (eBook)

Type: e-book
Genre: Biographies & Memoirs, Drama/Play
Language: Hindi
Price: ₹250
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

यह रचना लियो टॉलस्टॉय के जीवन के उस दौर को सामने लाती है, जब उनके आदर्श और निजी जीवन एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े थे। वे सत्य, नैतिकता और आत्मिक स्वतंत्रता की तलाश में थे, लेकिन परिवार, संबंधों और सामाजिक बंधनों से स्वयं को अलग कर पाना उनके लिए आसान नहीं था। वर्षों तक चला यह अंतर्द्वंद्व उनकी रचनात्मकता में भी दिखाई देता है और इसी कारण उनकी आत्मकथात्मक नाट्य-कृति अधूरी रह जाती है।
अंततः 1910 में टॉलस्टॉय अपने भीतर चल रहे संघर्ष से निर्णय की ओर बढ़ते हैं और घर छोड़ देते हैं। यह कदम उनके लिए केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि लंबे समय से खोजी जा रही आत्मिक स्वतंत्रता की प्राप्ति था। उनके जीवन की इसी निर्णायक घड़ी को ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर पूर्ण रूप देने का प्रयास स्टीफन स्वैग ने किया।

About the Author

रूपलेखा वर्मा का साहित्य के प्रति रुचि और लेखन का सफर 1960 के दशक के प्रारंभिक वर्षों से आरंभ हुआ। शुरुआती दौर में उनकी रचनाएँ विद्यालय की पत्रिकाओं में प्रकाशित हुईं। उनकी रचनाओं में जीवन के विविध अनुभवों और मानवीय संवेदनाओं की झलक मिलती है।

उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की। अपने व्यावसायिक जीवन में उन्होंने विभिन्न स्थानों पर शिक्षिका के रूप में कार्य किया, लेकिन लेखन उनके जीवन का प्रमुख रुझान और रचनात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम बना रहा।
रूपलेखा वर्मा ने कविताएँ, लघुकथाएँ और धारावाहिक रचनाएँ लिखी हैं।

डिजिटल मंचों पर भी उनकी रचनाओं को पाठकों का स्नेह मिला है। प्रतिलिपि उनके लेखन के प्रमुख प्रकाशन मंचों में से एक रहा है, जहाँ “माँ का प्रेम”, “संघर्ष” और “प्रत्युत्तर” जैसी लघुकथाएँ एवं धारावाहिक रचनाएँ प्रकाशित हुई हैं।

उनकी कई रचनाओं और श्रृंखलाओं को पाठकों द्वारा 5/5 की रेटिंग मिली है, जबकि उनकी अनेक कहानियों को 500 से अधिक पाठकों ने पढ़ा और सराहा है। छह दशकों से अधिक समय से निरंतर लेखन से जुड़ी रूपलेखा वर्मा का साहित्यिक सफर उनके रचनात्मक समर्पण और लेखन के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता का परिचायक है।

Book Details

Number of Pages: 49
Availability: Available for Download (e-book)

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