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“भारतीय संविधान” भारतीय लोकतंत्र की आत्मा, उसकी संस्थाओं, नागरिक अधिकारों, कर्तव्यों और राष्ट्र-निर्माण की संवैधानिक यात्रा को समझने का एक व्यापक और सरल प्रयास है। यह पुस्तक संविधान को केवल कानूनों और अनुच्छेदों के संग्रह के रूप में नहीं, बल्कि नागरिक जीवन, लोकतांत्रिक संस्कृति, सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय विकास के मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत करती है।
पुस्तक में संविधान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, संविधान सभा की भूमिका, प्रस्तावना, मौलिक अधिकार, नीति-निर्देशक तत्व, मौलिक कर्तव्य, सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता, संघवाद, संसद, कार्यपालिका, न्यायपालिका, निर्वाचन व्यवस्था, पंचायती राज, नगरपालिकाएँ और संवैधानिक संस्थाओं जैसे महत्वपूर्ण विषयों का क्रमबद्ध अध्ययन किया गया है।
इसके साथ ही पुस्तक संविधान और सुशासन, सार्वजनिक प्रशासन, आर्थिक एवं सामाजिक विकास, महिलाओं के अधिकार, शिक्षा, विज्ञान, डिजिटल युग, निजता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक राष्ट्रवाद जैसे समकालीन विषयों के संबंध को भी समझने का प्रयास करती है।
इस पुस्तक की विशेषता यह है कि यह संविधान को केवल परीक्षा या प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से नहीं देखती। इसका उद्देश्य पाठक को यह समझाना है कि संविधान उसके दैनिक जीवन से किस प्रकार जुड़ा हुआ है—उसकी स्वतंत्रता, समानता, गरिमा, सुरक्षा, अवसर, अधिकार और जिम्मेदारियों से लेकर लोकतांत्रिक व्यवस्था में उसकी भागीदारी तक।
पुस्तक का केंद्रीय विचार है कि अधिकार और कर्तव्य एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जीवन के पूरक आधार हैं। एक जागरूक नागरिक वही है जो अपने अधिकारों को समझने के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियों, दूसरों के अधिकारों और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को भी समझता है।
“भारतीय संविधान” विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षार्थियों, शिक्षकों, शोधार्थियों, लोकसेवकों, प्रशासनिक अधिकारियों और सामान्य नागरिकों के लिए उपयोगी होने के साथ-साथ उन सभी पाठकों के लिए भी है जो भारत के लोकतांत्रिक स्वरूप और संवैधानिक व्यवस्था को गहराई से समझना चाहते हैं।
अंततः यह पुस्तक एक सरल संदेश देती है—
संविधान को केवल पढ़िए नहीं, समझिए;
केवल अधिकार जानिए नहीं, कर्तव्य भी पहचानिए;
केवल लोकतंत्र में भाग लीजिए नहीं,
उसकी संवैधानिक भावना को अपने जीवन में भी उतारिए।
भारतीय संविधान केवल एक पुस्तक नहीं है—यह भारत के लोकतांत्रिक जीवन की आधारशिला है।
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