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वो अधेरी ँ रात (eBook)

Type: e-book
Genre: Mystery & Crime, Sex & Relationships
Language: Hindi
Price: ₹91
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

"वो अँधेअँधेरी रा त" प्रेम, बि छड़न, स्मृतिमृतियों और आत्म-खो ज की एक भा वना त्मक एवं चिं तनशी ल या त्रा है। यह उपन्या स
एक ऐसे व्यक्ति की कहा नी कहता है जि सकी ज़िं दगी की दि शा एक अँधेअँधेरी रा त में नदी के सुनसुसा न कि ना रे हुई एक
अप्रत्या शि त मुलामु लाक़ा त से बदल जा ती है। एक अजनबी से शुरूशु हुई दोस्ती धी रे-धी रे प्रेम में बदलती है, प्रेम वि वा ह तक
पहुँचता है, और फि र एक ऐसी रा त आती है जो उसकी पूरी दुनिदुनिया बदल देती है।
जी वन, हा लां कि , कभी एक ही मो ड़ पर नहीं ठहरता । समय के सा थ उसे फि र एक नई मुलामु लाक़ा त मि लती है—इस बा र
एक भी ड़ भरे बा ज़ा र में।में टूटे हुए वि श्वा स के बा वजूदजू वह दोबा रा प्रेम करना सी खता है, नया जी वन शुरूशु करता है और
फि र वि वा ह करता है। लेकि न नि यति एक बा र फि र उसके धैर्य, वि श्वा स और रि श्तों की परी क्षा लेती है। एक और
जुदा जु ई उसे फि र अकेला कर देती है।
अपने अती त से दूर जा ने की को शि श में वह एक लंबी या त्रा पर नि कलता है। पहा ड़ों की शां त वा दि यों में उसकी
मुलामु लाक़ा त एक और मुसामु साफ़ि र से हो ती है। ती सरी बा र प्रेम उसके जी वन में दस्तक देता है। वह अपने टूटे हुए सपनों को
फि र से संवा रने का प्रया स करता है, लेकि न भा ग्य एक बा र फि र उसके सा मने ऐसा मो ड़ ला ता है जहाँ उसे प्रेम, खो ने
और स्वी का र करने का वा स्तवि क अर्थ समझ में आने लगता है।
इन ती न प्रेम कथा ओं के मा ध्यम से यह उपन्या स केवल प्रेम संबंधों का वर्णन नहीं करता , बल्कि मनुष्नुय के भी तर चलने
वा ले संघर्ष, अकेलेपन, उम्मी द, स्मृतिमृतियों , धैर्य और आत्मबो ध की गहन या त्रा को भी प्रस्तुततु करता है। यह दि खा ता है
कि जी वन में मि लने वा ले हर व्यक्ति का अपना एक उद्देश्य हो ता है। कुछ लो ग हमा रे सा थ पूरी या त्रा तय करते हैं,हैं
जबकि कुछ केवल हमें जी वन का एक महत्वपूर्ण पा ठ सि खा ने आते हैं।हैं
कहा नी का अंति म भा ग ना यक को स्वयं की खो ज की ओर ले जा ता है। वह समझता है कि सच्ची शां ति केवल कि सी
दूसरे व्यक्ति में नहीं , हीं बल्कि अपने भी तर मि लती है। प्रेम का सबसे गहरा रूप केवल कि सी को पा ने में नहीं , हीं बल्कि
जी वन को उसकी समग्रता के सा थ स्वी का र करने में है।
सरल भा षा , जी वंत वर्णन, भा वना त्मक संवा द और जी वन के गहरे अनुभनुवों से समृद्धमृ यह उपन्या स पा ठकों को आरंभ से
अंत तक बाँ धे रखता है। यह केवल एक प्रेम-कथा नहीं , हीं बल्कि जी वन, रि श्तों , समय, नि यति और आत्म-स्वी का र की
एक सा हि त्यि क या त्रा है, जो पा ठकों को भा वना त्मक रूप से जो ड़ते हुए उन्हें अपने जी वन के अनुभनुवों पर भी वि चा र
करने के लि ए प्रेरि त करती है।
"वो अँधेअँधेरी रा त" उन सभी पा ठकों के लि ए है जि न्हों ने कभी प्रेम कि या है, कि सी अपने को खो या है, जी वन की कठि न
रा हों पर अकेले चले हैं और फि र भी उम्मी द का दामन नहीं छो ड़ा । यह उपन्या स या द दि ला ता है कि हर अँधेअँधेरी रा त के
बा द एक नई सुबसुह जन्म लेती है, और हर अधूरीधूरी कहा नी हमें अपने भी तर छि पे एक नए सत्य तक पहुँचा ने का मा ध्यम बन
सकती है।

About the Author

रूपेश रंजन एक स्वतंत्र लेखक, शो धकर्ता और सा हि त्य-प्रेमी हैं, हैं जि नकी रुचि उपन्या स, इति हा स, समा ज, शि क्षा ,
पर्या वरण, दर्शन, संस्कृति और समका ली न वि षयों पर मौ लि क लेखन में है। उनका उद्देश्य ऐसे सा हि त्य का सृजन
करना है जो केवल मनो रंजन ही नहीं , हीं बल्कि पा ठकों को वि चा र करने, जी वन को नए दृष्टि को ण से देखने और मा नवी य
संवेदना ओं को गहरा ई से समझने के लि ए प्रेरि त करे।
उनकी लेखन शैली सरल, प्रवा हपूर्ण, वर्णना त्मक और भा वना त्मक है। वे मा नते हैं कि सा हि त्य केवल शब्दों का संग्रह
नहीं , हीं बल्कि अनुभनुवों , भा वना ओं और मा नवी य संबंधों का जी वंत दस्ता वेज़ हो ता है। इसी वि चा रधा रा के सा थ वे ऐसी
कृति यों का सृजन करते हैं जो पा ठकों के हृदय और मन दोनों को स्पर्श करें।रें
"वो अँधेअँधेरी रा त" उनकी एक मौ लि क सा हि त्यि क कृति है। यह उपन्या स प्रेम, बि छड़न, आशा , संघर्ष, स्मृतिमृतियों और
आत्म-खो ज की या त्रा को गहरा ई से प्रस्तुततु करता है। ती न अलग-अलग प्रेम कहा नि यों के मा ध्यम से यह कृति मनुष्नुय के
जी वन में आने वा ले परि वर्तन, रि श्तों की ना ज़ुकज़ु ता और स्वयं को पहचा नने की प्रक्रि या का संवेदनशी ल चि त्रण करती
है।
लेखक का वि श्वा स है कि हर कहा नी अपने भी तर एक नया जी वन-दर्शन छि पा ए हो ती है। यदि को ई रचना पा ठक के
मन में एक नया वि चा र, एक नई अनुभूनुतिभूति या जी वन के प्रति नई आशा जगा सके, तो वही उसकी सबसे बड़ी सफलता
है।
रूपेश रंजन भवि ष्य में भी वि भि न्न वि षयों पर मौ लि क, शो धपरक और सा हि त्यि क कृति यों के मा ध्यम से पा ठकों तक ज्ञा न,
संवेदना और प्रेरणा पहुँचा ने के लि ए प्रति बद्ध हैं|

Book Details

Number of Pages: 150
Availability: Available for Download (e-book)

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