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क्या आप जो सोचते हैं, वही वास्तव में सत्य है?
हमारी सोच केवल हमारे निर्णयों को प्रभावित नहीं करती—वह यह भी तय करती है कि हम वास्तविकता को किस तरह देखते हैं।
NESCIENT आपको अपनी ही सोच को एक अलग दृष्टि से देखने की यात्रा पर ले जाती है। यह पुस्तक समझने की कोशिश करती है कि हमारा मस्तिष्क सरल निष्कर्षों की ओर क्यों जाता है, हमारी धारणाएँ कैसे बनती हैं और किस तरह हमारे अनुभव, ध्यान, भावनाएँ और मानसिक संरचनाएँ हमारे निर्णयों को प्रभावित करती हैं।
पुस्तक में सोच के तीन स्तरों—वन-डायमेंशनल, टू-डायमेंशनल और थ्री-डायमेंशनल थिंकिंग—के माध्यम से यह समझने का प्रयास किया गया है कि किसी घटना को केवल एक दृष्टिकोण से देखने और उसके कारण, संदर्भ तथा प्रभावों को समझने में क्या अंतर है।
इसके साथ ही पुस्तक भावनाओं, आदतों, अनुभव, कर्म और आत्म-परिवर्तन जैसे विषयों पर भी विचार करती है।
शायद सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है—
क्या मैं अपनी सोच को नियंत्रित करता हूँ, या मेरी सोच मुझे नियंत्रित करती है?
यदि आप अपनी सोच और अपनी धारणाओं को केवल स्वीकार करने के बजाय उन्हें समझना चाहते हैं, तो NESCIENT आपको अपने ही विचारों को एक नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर देती है।
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