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पुस्तक "4 दृष्टिकोण 4 कहानियाँ भाग 1" में चार भिन्न-भिन्न पृष्ठभूमि की कहानियों को समाहित किया गया है, जो पाठकों को जीवन, समाज, विज्ञान और तकनीक के चार अलग-अलग नज़रों से रूबरू कराती हैं।
1. जल: एक संघर्ष, एक दर्शन
"जल: एक संघर्ष, एक दर्शन" सौरभ जैन की एक अत्यंत प्रभावशाली और वैचारिक रचना है। यह कहानी जीवन के दो मुख्य दृष्टिकोणों के बीच के अंतर्संबंधों और द्वंद्वों को उजागर करती है—एक ओर जहाँ माँ शारदा का 'जल की तरह बहते रहने और समस्याओं को धोने' का शांत व गहरा जीवन दर्शन है, वहीं दूसरी ओर पिता रमेश जी का 'मेहनत और लगन की बैलेंस शीट' का व्यावहारिक दृष्टिकोण है। उपन्यास का नायक, आदर्श, इन दोनों विचारों की नींव पर बड़ा होता है। जब वह पुणे के प्रतिष्ठित सिम्बायोसिस कॉलेज में एमबीए करने पहुँचता है, तो उसका सामना आधुनिकता, रसूख, हेरफेर (मैनिपुलेशन) और अहंकार के 'कीचड़' से होता है। वह इस कीचड़ के आगे घुटने टेकने के बजाय खुद को जल की तरह ढालता है। यह उपन्यास आज की युवा पीढ़ी को यह सीख देता है कि बिना अपने चरित्र और सिद्धांतों से समझौता किए, किस प्रकार सत्य, संयम और कड़ी मेहनत के बल पर जीवन की सबसे कठिन चट्टानों को काटकर अपना मार्ग प्रशस्त किया जा सकता है।
2. बिजनेस मॉडल
"बिजनेस मॉडल" सौरभ जैन की एक अत्यंत प्रभावशाली और रोमांचक रचना है। यह कहानी मुंबई की तंग गलियों और कॉर्पोरेट जगत के टकराव को दर्शाती है—जहाँ एक मध्यमवर्गीय पिता की सादगी और मेहनत ही बेटे के लिए आत्मसम्मान और न्याय का सबसे बड़ा भावनात्मक आधार बनती है। जब आर्यन का सामना शहर के रसूखदार गुंडों और कॉर्पोरेट राजनीति के कीचड़ से होता है, तो वह उनके चक्रव्यूह को बल से नहीं, बल्कि अपनी बुद्धिमत्ता और रणनीतिक 'बिजनेस मॉडल' से ध्वस्त करता है।
3. लेंस
"लेंस" एक आधुनिक युग की गाथा है जो आज के भारत की सामाजिक और तकनीकी वास्तविकताओं को दर्शाती है। यह कहानी कबीर की है, जो आईआईटी दिल्ली का एक बेहतरीन कोडिंग ग्रेजुएट है। उसकी दुनिया केवल कोडिंग, एल्गोरिदम और बाइनरी नंबरों तक सीमित थी। लेकिन जब आहना—जो सोशल साइंस में पोस्ट-ग्रेजुएट है—उसकी संकुचित सोच को चुनौती देती है, तो कबीर का पूरा नज़रिया बदल जाता है।
वह अपनी तकनीकी प्रतिभा को समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के व्यापक दृष्टिकोण (Divergent Perspective) से जोड़ता है। वह देश के प्रधानमंत्री के साथ मिलकर "कन्वर्जेंस-2026" नामक एक डेटा मॉडल पर काम करता है जो सीधे गरीबों तक सरकारी लाभ पहुँचाता है। लेकिन विपक्ष के सामंतवादी नेता और डिजिटल माफिया उसके खिलाफ साजिश रचते हैं। यह उपन्यास तकनीक, देशभक्ति, राजनीति और प्रेम के सुंदर अपवर्तन (Refraction) की एक अद्भुत कहानी है।
4. ज़ात
उपन्यास 'ज़ा त' (Caste) सामाजिक विसंगतियों, आर्थिक शोषण और मानवीय मूल्यों के अंतर्द्वंद्व की एक बेहद मार्मिक और विचारोत्तेजक गाथा है। यह कहानी केवल जाति-पाति के पारंपरिक रूप पर प्रहार नहीं करती, बल्कि काम और पेशे के आधार पर बने उस सामाजिक वर्गीकरण को उजागर करती जिसके कारण समाज का एक बड़ा हिस्सा निरंतर पिसता रहता है।
कहानी का नायक, कबीर, एक साधारण पृष्ठभूमि का युवक है जो अपने सीधे-साधे पिता रमेश के निरंतर होने वाले शोषण और अपमान को देखकर बड़ा होता है। कॉलेज के एक भीषण हादसे, अपनों के धोखे और व्यवस्था की क्रूरता के कारण कबीर को कॉलेज से निकाल दिया जाता है। इस अंधकारमय मोड़ पर, वह न तो हार मानता है और न ही बदला लेने के लिए अपराध का रास्ता चुनता है। उसकी माँ सीता, जो जैन शास्त्रों की ज्ञाता हैं, उसे 'दूब' (घास) का दर्शन सिखाती हैं—कि असली ऊँची ज़ात वह है जिसके हृदय में दूसरों के प्रति दया और करुणा हो।
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