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प्रस्तुत पुस्तक जिसका नाम मन की पीड़ा रखा गया है इसका एक विशेष कारण है जो कि ये है -- मैंने कुछ समय से ये अनुभव किया है कि हर लेखक अपने अलग ही भाव से अपनी कविता लिखता है लेकिन ज्यादातर लोग अपने अकेले समय में वही लिखते हैं जो उनके हृदय में उथल पुथल चल रही होती है ,,, जैसे कि अपना दुख , हृदय की पीड़ा , प्रेम के मार्मिक क्षण, हृदय विखंडन आदि ।
इसलिए मैने इस साझा संकलन को बनाया है जिसमें प्रत्येक लेखक अपने मन के भाव खुशी , दुख , पीड़ा , उत्तेजना को अपने शब्दों के माध्यम से लोगो तक पहुँचा सकें ।
इसका सबसे अच्छा माध्यम है कविता , जिसे लोगो को पढ़कर सुकून आता है और लेखकों को लिख कर सुकून आता है ।
सृष्टि कहती हैं------
" भले मैं कह ना सकी लेकिन लेकिन लेकिन किसी ने तो पढ़ा किसी ने तो समझा ये सोचकर ही दिल को सुकून आ जाता है इतना काफी है मेरे लिए !"
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