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मन की पीड़ा Man Ki Peeda (eBook)

साझा संकलन
Type: e-book
Genre: Romance, Poetry
Language: Hindi
Price: ₹79
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF, EPUB

Description

प्रस्तुत पुस्तक जिसका नाम मन की पीड़ा रखा गया है इसका एक विशेष कारण है जो कि ये है -- मैंने कुछ समय से ये अनुभव किया है कि हर लेखक अपने अलग ही भाव से अपनी कविता लिखता है लेकिन ज्यादातर लोग अपने अकेले समय में वही लिखते हैं जो उनके हृदय में उथल पुथल चल रही होती है ,,, जैसे कि अपना दुख , हृदय की पीड़ा , प्रेम के मार्मिक क्षण, हृदय विखंडन आदि ।

इसलिए मैने इस साझा संकलन को बनाया है जिसमें प्रत्येक लेखक अपने मन के भाव खुशी , दुख , पीड़ा , उत्तेजना को अपने शब्दों के माध्यम से लोगो तक पहुँचा सकें ।
इसका सबसे अच्छा माध्यम है कविता , जिसे लोगो को पढ़कर सुकून आता है और लेखकों को लिख कर सुकून आता है ।

सृष्टि कहती हैं------

" भले मैं कह ना सकी लेकिन लेकिन लेकिन किसी ने तो पढ़ा किसी ने तो समझा ये सोचकर ही दिल को सुकून आ जाता है इतना काफी है मेरे लिए !"

About the Author

इनका नाम सृष्टि शिवहरे है । महत्वाकांक्षी लेखकों के लिए, सृष्टि शिवहरे एक महान प्रेरणा हैं । इन्होंने 100 से अधिक पुस्तकों में अपने महत्वपूर्ण योगदान के साथ अपना लेख प्रकाशित किया है, इनकी स्वयं को 18 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिसमे से आठ संकलन हैं जिनको स्वयं इन्होंने ही संकलित किया है । ये पढ़ाई में होनहार छात्राओं में से एक है , इन्होंने भारत के सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी की है और बीएससी में प्रथम श्रेणी प्राप्त की इसके अलावा इन्होंने आई.टी.आई. ( इलेक्ट्रिकल C.O.E ) का डिप्लोमा किया है जिसे भी इन्होंने प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण किया है । इन्हें लेखन के प्रति रूचि अपने पिताजी से मिली ..
इनके पिता स्व. रामहरी शिवहरे जी और माता श्री मति ममता शिवहरे जी हैं । इनके पिताजी ने शायरी, ग़ज़ल और अन्य साहित्यिक कृतियों के गायन से इन्हें प्रोत्साहन दिया । बाल्य काल की उम्र से ही महज छठवी कक्षा से ही इन्होंने कविता लिखना शुरू कर दिया था । ऐसे ही इनकी रुचि लेखन के प्रति बढ़ती गई ।
दुर्भाग्यपूर्ण आज इनके पिताजी इनके साथ नहीं हैं पर वह अपने पिता को आज भी बहुत याद करती है । इनके लेखिका बनने का सपना इनके पिता का ही था जो इन्होंने उस सपने को साकार कर दिखाया । और आगे और बड़ी लेखिका बनने के लिए ये अग्रसर है । और ऐसे लेखकों को जो अपनी कविता प्रकाशित करने का सपना संजोए हैं उनके सपनों को साकार करना इनका मुख्य उद्देश्य है । ये हमेशा नए नए लेखक लेखिकाओं को खोजती रहती हैं जिससे ये उनके सपने को पूरा करने में कुछ सहायता कर सके ।इनके
पिता जी के जाने के बाद इनकी मां ने ही इन्हें लेखन के लिए प्रोत्साहित किया और आज भी करती है ।। इनकी पुस्तकें जो कि स्व संपादित एवं स्वरचित है जो कि वैश्विक स्तर पर हर प्लेटफार्म पर उपलब्ध है।

Book Details

ISBN: 9789358262766
Publisher: SRSD Publication Jhansi
Number of Pages: 125
Availability: Available for Download (e-book)

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मन की पीड़ा Man Ki Peeda

मन की पीड़ा Man Ki Peeda

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