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मृत्युंजय कर्ण (eBook)

गाथा त्याग, निष्ठा और पराक्रम की
Type: e-book
Genre: Literature & Fiction, Poetry
Language: Hindi
Price: ₹129
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

"मृत्युंजय कर्ण” कर्ण के जीवन, संघर्ष और अंतर्मन को एक अलग दृष्टि से प्रस्तुत करने वाली एक दीर्घ काव्य-रचना है। जो कर्ण से जुड़े कई प्रश्नों पर हमें विचार करने के लिए मजबूर करती है।
सूर्यपुत्र होकर भी पहचान के संघर्ष से गुजरने वाला कर्ण, आजीवन राधेय के रूप में पला, अपने सामर्थ्य को सिद्ध करने के लिए जीवन भर संघर्ष करता रहा और परिस्थितियों के बीच अपनी निष्ठा, आत्मसम्मान और अस्तित्व की लड़ाई लड़ता रहा।

यह रचना कर्ण को केवल एक महान योद्धा या दानवीर के रूप में नहीं देखती, बल्कि उसके भीतर के मनुष्य को सामने लाने का प्रयास करती है—उस मनुष्य को, जिसके जीवन में सम्मान और अपमान, निष्ठा और धर्म, त्याग और इच्छा, पराक्रम और नियति लगातार एक-दूसरे से टकराते रहे।

कर्ण की कथा केवल उसके जन्म और मृत्यु की कथा नहीं है। यह पहचान, संघर्ष, स्वाभिमान, निष्ठा, त्याग और नियति के बीच अपने अस्तित्व को तलाशते एक मनुष्य की यात्रा है।

कर्ण युद्धभूमि में मृत्यु को प्राप्त हुआ, लेकिन उसकी कथा वहीं समाप्त नहीं हुई। उसके जीवन से जुड़े प्रश्न, उसके निर्णय और उसका व्यक्तित्व आज भी स्मृति में जीवित हैं।

“मृत्युंजय कर्ण” उसी अमर कथा को एक दीर्घ काव्य के रूप में देखने और महसूस करने का एक प्रयास है।

अगर आप हिन्दी काव्य, महाभारत के पात्र और विशेष करके सूर्यपुत्र, दानवीर कर्ण के बारे में पढ़ने या जानने में रुचि रखते है, तो यह पुस्तक आपके लिए एक बहुत ही अच्छी साबित हो सकती है। तो इस पुस्तक को पाने के लिए अभी अपनी पुस्तक की प्रत सुनिश्चित करें।

About the Author

तुषार सुर्यवंशी एक युवा विद्यार्थी और संवेदनशील कवि हैं, जो वर्तमान में B.Tech की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। तकनीकी और साहित्य, दो एकदम अलग प्रतीत होने वाले विषयों के बीच उनका लेखन अपनी एक अलग दृष्टि प्रदान करता है।
कविता उनके लिए केवल शब्दों को पंक्तियों में सजाने का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य, समाज और जीवन के अनकहे प्रश्नों को अभिव्यक्त करने का एक प्रयास है। उन्होंने अब तक अप्रकाशित, खुद की खोज, अंतिम समय, जैसी हिन्दी और प्रेम म्हणजे काय, मनुष्य की दानव, शंभुराजे, शुभ सकाळ जैसी अनेकों मराठी कविताओं की रचना की है। “मृत्युंजय कर्ण” उनके प्रकाशित काव्य-लेखन की दिशा में एक महत्वपूर्ण आरंभ है।

Book Details

Number of Pages: 64
Availability: Available for Download (e-book)

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मृत्युंजय कर्ण

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