Description
पुस्तक परिचय
इस पुस्तक में वसी अहमद कादरी जी ने अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को कविता के माध्यम से व्यक्त किया है। पुस्तक की कविताएं जीवन के विभिन्न पहलुओं पर केंद्रित हैं, जैसे कि प्रेम, जीवन, मानवता, मृत्यु, आत्म-खोज, साइंस इत्यादि पर (वसी अहमद कादरी) जी ने कविताएं लिखी हैं केवल केवल भावपूर्ण ही नहीं हैं, बल्कि वे पाठकों को भी सोचने और आत्म-मंथन करने के लिए प्रेरित करती हैं।
हमारी (वसी अहमद कादरी) जी की कविता शैली अद्वितीय हैं और उनकी सरल भाषा में लिखी गई ताकि सभी को आसानी से समझ में आ जाए क्यूं की न हिंदू भाई शुद्ध बोलते हैं और न ही मुसलमान उर्दू ढंग से समझते हैं और न ही बोलते हैं इसलिए हमने भाषाओं का मिश्रण इस्तेमाल किया है क्यूं के जब बात समझ में आती है तो पढ़ने में दिल लगता है और यह स्पष्ट है। हमारी कविताएं पाठकों को एक नए दृष्टिकोण से दुनिया को देखने के लिए प्रेरित करती हैं और उन्हें जीवन के अर्थ और उद्देश्य के बारे में सोचने के लिए प्रोत्साहित करती हैं और प्रेरणा मिलती है।
'कायनात में वसी' एक ऐसी कविता पुस्तक है जो पाठकों को कविता की दुनिया में एक नए यात्रा पर ले जाने के लिए तैयार करती है। यह पुस्तक न केवल कविता प्रेमियों के लिए, बल्कि उन सभी लोगों के लिए भी उपयुक्त है जो जीवन के अर्थ और उद्देश्य को समझने के लिए उत्सुक हैं और जीवन क्या है और इसका उपयोग कैसे करनी चाहिए यह सीखने को मिलेगा। इस पुस्तक के माध्यम से, वसी अहमद कादरी जी ने अपनी कविता की अद्वितीय शैली और अपने विचारों को पाठकों के साथ साझा किया है।
यह पुस्तक निश्चित रूप से पाठकों को प्रभावित करेगी और उन्हें कविता की दुनिया में एक नए दृष्टिकोण से देखने के लिए प्रेरित करेगी और इसे विभिन्न भाषाओं में पढ़ने वाले वसी अहमद कादरी जी का कविता पढ़ने के लिए उत्सुक है इसलिए की पुस्तक प्रकाशित होने से पहले देश विदेश के लोग जान गए हैं व्हाट्सएप के माध्यम से वसी अहमद कादरी जी 21 वीं शताब्दी में अनोखा और नायाब लेखक पत्रकार और कवि हैं कवियों में गुप्त हैं।
'वसी अहमद कादरी' किसी परिचय का मोहताज नहीं है ये (ईश्वर) अल्लाह की कृपा है कि वसी अहमद कादरी ने अपनी जीवन की खुशियां तर्क करके ईश्वर की शरण में जो कुछ ज्ञान मिला है इस माध्यम से हम ने फैसला किया की देश विदेश के लोगों को जीवन में खुशहाली आए और मरने के बाद आत्मा को शांति मिले इस विषय पर आधारित ये कविता संग्रह पुस्तक है।
वसी अहमद कादरी, वसी अहमद अंसारी मुफक्किर मखलुकात, मुफक्किर कायनात दरवेश ! लेखक ! कवि
कायनात खुदा की है इसमें रहता है वसी
हम देखना चाहते उसे आजतक न दिखा
दिल मायूस हो जाता कभी कभी किसे बताएं
मायूसी के दूसरे पहर में उगता हुआ किरण देखा
ख्याल में आया वह आंखों में नहीं दिल में आता है
दिल की बातें बताता हूं किसी से यकीं नहीं करता
यकीं है क्या पत्थर दिल को यकीन होता नहीं है
पत्थर पूजने वाले में एक यकीं का खुदा नहीं होता
विवरण:
हमारी कविताएं और लेख _ मज़हबी, सियासी, साइंस, समाजी माहौल और इंसानी फ़िक्र वो अमल पर आधारित लेख है जो दुनियां की आठ अरब आबादी को पसंद आ आना चाहिए !
Our poems and articles—rooted in themes of religion, politics, science, the social environment, and human thought and action—are writings that should appeal to the world's population of eight billion people!
वसी अहमद क़ादरी " वसी अहमद अंसारी का एक लम्हें ज़िन्दगी का लम्हा परिचय
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माता पिता जी के मौत के बाद वैसा ही देखने को मिला है हमें इसलिए फ़िर कहता हूं कि मेरा परिचय और तारीफ़ कुछ नहीं है मेरी तारीफ़ मेरे माता पिता जी की चरित्र , आचरण और उनके कर्म और कारनामे से जुड़ी है लिहाज़ा माता पिता का कारनामा जैसा होगा उसके संतान पर पड़ती है सच्चा पक्का, ईमानदा और दयालु माता पिता की संतान कुछ न कुछ असर रखती लेकिन बहुत लोग समाज की माहौल में बदल जाते हैं और एक असूल वाले लोग अपने असूल पर क़ायम रहते हैं ! हमने अपनी ज़िंदगी के अनुभव में पाया और देखा है कि ननिहाल, ददिहाल और रिश्तेदारों से बहुत सताया गया हूं बावजूद इसके हर दुःख तकलीफ़ दिल में रखते हुए सब्र किया के हम आगर किसी से बदला लेने का इरादा किया तो मेरी जीवन उलझ जाएगी और हम कामयाबी की मंज़िल नहीं पा सकेंगे और कामयाबी की दो किस्में है एक मिटने वाली दुनियां में चंद दिनो कि कामयाबी क्यूं के मौत तो आना ही आनी है इस से न हम बच सकेंगें और न ही कोई दुनियां में ऐसा इंसान देखने या सुनने में मिली है की कोई सदा के लिए जीवित रहा है यहां दुनियां में यहां दिल गवाही देती है के हमें जन्म देने वाले खुदा ने यूहीं नहीं भेजा है वह दिखाई भी नहीं देता और कायनात का निज़ाम भी चल रहा है और तरह तरह जीव प्राणी को मेरी नज़र देखती है इन तमाम हालत पर गौर वो फ़िक्र करने के बाद दिल ज़वाब देती है कि दुनियां में बे शुमार आबादी है उन आबादियां में किसी का किसी भी मामले में नक़ल नहीं करने हैं हम कुछ ऐसा करें के किसी जीव प्राणी और जंतु को हानि नहीं पहुंचे मतलब ये कि कोई मेरे कर्म और कारनामे का नक़ल करे हमें किसी का नक़ल नहीं करने हैं।
मेरी बचपना, जवानी और फ़िर मेरे शादी होने तक रिश्तेदारों से लेकर जानने वाले लोगों ने भी मेरे कर्म और कारनामे में टांग अराते रहे फ़िर भी हम न किसी का शिकायत किया हैऔर न ही सुनने में दिलचस्पी रही महज़ इसलिए कि समय की बर्बादी चरित्र आचरण में दाग लगना जैसा एहसास हुआ मेरे इस कारनामे से लोग हमसे दूर होते गए और हम तनहा हो गए मेरी तन्हाई जीवन ने खुदा की कायनात और खुदा की जीव प्राणी और जंतु के बारे में ख़्याल उभरती रही के आख़िर खुदा इन सभी को क्यूं पैदा किया फ़िर दिल में ख़्याल आता है कि इन सभी की ज़िम्मेदारी तुम पर है तुम्हारे सामने जो नज़र आए उसकी हक़ तुम्हे अदा करो हैं ये मेरा काम नहीं है क्यूं के हम इंसान के रु ब रु नहीं होते और हमने तुम्हे हाथ पैर _ दिल दिमाग़ सब कुछ दिया है सोचने समझने के बाद सोच समझ कर दिल दिमाग़ को काबू में रखते हुए अपने कामों को अंजाम दो क्यों केतुम्हारी मौत होगी और मरने के बाद मेरे पास आना है इसलिए मैं कहता हूं कि मेरा कोई परिचय और तारीफ़ नहीं है हम जैसा कर्तव्य इस दुनियां में करेंगे यही मेरी तारीफ़ होगा जिसे हम देख नहीं सकते जो लोग जब तक जीवित रहेंगे मेरा अच्छा और ख़राब किया गया करनामा जब तक दुनियां रहेगी लोग पढ़ते रहेगें मतलब खुदा की हुक्म और उसका तारीफ़ करने में ही मेरी भलाई है यानि बुरे चरित्र आचरण वाले लोगों के दिल में अच्छी ख्यालात नहीं उभरती है इसलिए अच्छे चरित्र आचरण वाले लोगों को बुराई करने में उनकी उम्र गुज़र जाती है अच्छा खाने अच्छे कपड़े और अच्छा मकान रहने को मिल जाता है जिसे वह कामयाबी समझता है जिसे ख़ुद मालूम नहीं है कि मेरी जीवन कितनी है लिहाज़ा हमने हर पहलू और खुदा की पैदा किया हुआ जीव प्राणी और जंतु पर गौर किया इसलिए हमें किसी भी मौजी पर लिखने में न क़िताब पढ़ने की ज़रूरत होती है और न ही किसी से सलाह लेने की क्यूं वह उस लायक़ नहीं है जो हमें सलाह दे सके यानि खुदा ने मुझे अपने मोहताजी में रखा है दुनियां की अवाम हमें पढ़ सके अपनी ज़िंदगी बनाने और बिगाड़ने में हर subject पर लेख और बहुत सारे कविताएं लिखी है मेरा हर कविता अपने आप में एक किताब है जितना लिख सकता हूं लिख रहा हूं और जब तक सांस चल रही है लिखता रहूंगा मगर क़िताब छपवानेके लिए पैसे नहीं है इसलिए सोशल मीडिया के सभी साइट पर लिखता हूं आप पढ़ सकते हैं लोग हमें WASI AHMAD QADRI ( WASI AHMAD ANSARI के नाम से जानते हैं और ये नाम भी मेरा नहीं ये नाम भी खुदा का है यही मेरा परिचय और तारीफ़ है।
हमारी कोई तारीफ़ नहीं न हम तारीफ़ के लायक़ हैं
खुदा की तारीफ़ के लिए ही जन्म दिया गया है वसी
हमारी ख़ुदकी ख्वाहिंश सुनी नहीं जाती ये मिशाल है
देश और दुनियां की हित में होता वही कबूल होता है
यहां दिल को इत्मीनान है सबको सबकुछ नहीं दिया
खुदा को समझ लेना यह सब से बड़ा दौलत है जीवन में
जिसने ज़िंदगी को समझा वह जीना नहीं चाहते इस युग में
मौत न आए ये वह चाहते जिसकी कोठी धन से भरा है
वसी अहमद क़ादरी ! वसी अहमद अंसारी ।
दरवेश ! लेखक ! मुफक्किर ! पोशीदा शायर