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चाँद रात और जुगनू (eBook)

महकती शायरी का एक खूबसूरत गुलदस्ता (उर्दू ट्रांसलेशन सहित)
Type: e-book
Genre: Poetry
Language: Hindi, Urdu
Price: ₹199
(Immediate Access on Full Payment)
Available Formats: PDF

Description

चाँद रात और जुगनू (Chand Raat Aur Jugnu)
महकती शायरी, ग़ज़लों और नग्मों का एक खूबसूरत गुलदस्ता (उर्दू अनुवाद सहित)
— रचनाकार: ज़िया शाहजहानी

“ज़िंदगी, इश्क़, माँ की ममता और फ़िल्मी धुनों का एक पुरनूर सफ़र”
“न मतला ही ढूंढा न मक़्ता बनाया, ना शेरों को मिसरे पे रख कर सजाया। फ़क़त लिख दिया एक ‘माँ’ लफ़्ज़ मैंने, महक उट्ठा काग़ज़, क़लम जगमगाया।।”

किताब के बारे में (About the Book):
‘चाँद रात और जुगनू’ महज़ काग़ज़ पर उकेरे गए अल्फ़ाज़ नहीं, बल्कि इंसान के दिल की उन अनकही ख़ामोशियों की सदा है। समकालीन हिंदी-उर्दू अदब के सशक्त हस्ताक्षर ज़िया शाहजहानी की क़लम से निकला यह संकलन भावनाओं, प्रेम, हिज्र, इबादत और संवेदनाओं का ऐसा संगम है जो सीधे रूह को छू जाता है।

इस किताब की सबसे बड़ी विशेषता इसका द्विभाषी स्वरूप (Bilingual Edition) है। प्रत्येक हिंदी रचना के साथ उसका संपूर्ण और शुद्ध उर्दू अनुवाद (رسم الخط اردو) शामिल किया गया है, ताकि हिंदी और उर्दू दोनों अदबी ज़ौक़ रखने वाले पाठक इसका भरपूर आनंद ले सकें।

इस संग्रह के तीन अनूठे पड़ाव (Key Highlights):
पहला पड़ाव — हम्द, नज़्में व ग़ज़लें:
रूहानी इबादत और हम्द-ए-इलाही।
मुनव्वर राना की नफ़ासत में माँ की पाकीज़ा ममता और आशीर्वाद।
गाँव की सोंधी माटी, साझा संस्कृति और गंगा-जमुनी तहज़ीब की महक।
दूसरा पड़ाव — फुटकर अशआर व रुबाइयात:
निदा फ़ाज़ली और बशीर बद्र के अंदाज़ में ढले गहरे दो-सत्रीय शेर।
तन्हाई, ख़्वाब, वफ़ा, ज़िन्दगी के फलसफे और सीधे दिल पर दस्तक देती रुबाइयाँ।
तीसरा पड़ाव — फ़िल्मी नग्मे व सूफ़ी कलाम:
सिनेमैटिक विज़न में रचे गए दिलकश रोमांटिक व प्रेरणादायक गीत।
ब्रज व अवध के पारंपरिक लोकगीत (होली गीत)।
भक्ति भजन, भावपूर्ण विरह गीत और दरगाह की रूहानी सूफ़ी क़व्वालियाँ।

यह किताब आपके लिए क्यों ख़ास है?
सरल व असरदार भाषा: कठिन क्लिष्टता से दूर, दिल में उतर जाने वाले अल्फ़ाज़।
हिंदी एवं उर्दू (Line-by-Line / Side-by-Side): दोनों लिपियों के पाठकों के लिए एक मुकम्मल तोहफ़ा।
हर मिज़ाज का संगम: मोहब्बत की नज़ाकत से लेकर सामाजिक चेतना और इंक़लाब की पुकार तक।

यदि आप रात के सन्नाटों में जुगनू जैसी उम्मीद और चाँदनी जैसी ठंडक तलाश रहे हैं, तो ‘चाँद रात और जुगनू’ आपकी तन्हाइयों का सबसे सच्चा हमसफ़र साबित होगी।

आज ही अपनी प्रति ऑर्डर करें और शायरी के इस पुरनूर सफ़ر का हिस्सा बनें!

About the Author

ज़िया शाहजहानी समकालीन हिंदी-उर्दू अदब के ऐसे पुरअसर कलमकार हैं, जिनकी लेखनी में क्लासिकी नफ़ासत और आधुनिक संवेदनाओं का दुर्लभ संगम दिखाई देता है। इंसानी जज़्बातों की बारीक़ समझ और सिनेमैटिक गीतों की लयबद्धता उनकी शायरी की सबसे बड़ी ताक़त है।

Book Details

Publisher: Pothi.com
Number of Pages: 201
Availability: Available for Download (e-book)

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चाँद रात और जुगनू

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