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ई कथा गढ़ नारिकेल नामक गामसँ शुरू होइत अछि। गामक गाछ, नदी, पोखरि, बच्चा, स्त्री, मजदूर आ पुरखा सभ मिलि एकटा जीवित स्मृति बनबैत छथि।
कथामे “गोहि” केवल नदीक जन्तु नहि। कखनो लालच, कखनो झूठ, कखनो डर, कखनो अन्याय आ कखनो फोनक भीतर छिपल ठगी सेहो गोहि बनि जाइत अछि।
पढ़ैत काल कठिन शब्द भेटय तँ प्रसंगसँ अर्थ बुझबाक प्रयास करू। प्रश्न पूछू, नाम पूरा पढ़ू, ककरो निजी बात बिना मञ्जूरी साझा नहि करू, आ कमजोर लोकक संग ठाढ़ रहू—एहि पोथीक मुख्य सीख ई अछि।
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