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अनुक्रम
शंकरक ब्रह्मसूत्रभाष्यपर वाचस्पति मिश्रक टीका
मूल संस्कृत: वाचस्पति मिश्र • संस्कृतसँ शुद्ध मैथिली अनुवाद: गजेन्द्र ठाकुर
अध्याय १ : प्रस्तावना, दार्शनिक अनुशीलन आ स्रोत-सङ्केत
प्रस्तावना
वाचस्पति मिश्र: 'सर्वतन्त्रस्वतन्त्र' व्यक्तित्व आ ऐतिहासिक सन्दर्भ
अद्वैत वेदान्तक प्रस्थान-भेद: भामती आ विवरण
भामती-टीकाक परम्परा आ उप-प्रस्थान
गजेन्द्र ठाकुर कृत मैथिली अनुवादक संरचना आ दार्शनिक गाम्भीर्य
मङ्गलाचरणक भाषिक सौन्दर्य
अध्यास-भाष्यक सूक्ष्म मीमांसा
पूर्वपक्षक निर्माण आ तार्किक खण्डन
ख्यातिवाद-विमर्श आ अनिर्वचनीयख्यातिक स्थापना
आत्माक स्वयंप्रकाशता आ जीवभाव
प्रथम सूत्र: 'अथातो ब्रह्मजिज्ञासा'
द्वितीय सूत्र: 'जन्माद्यस्य यतः'
तृतीय सूत्र: 'शास्त्रयोनित्वात्'
चतुर्थ सूत्र: 'तत्तु समन्वयात्'
सिद्धान्त: समन्वय आ स्वतः प्रामाण्य
मोक्षक कूटस्थ नित्यता आ भेदाभेदवादक निरास
सिद्धवस्तु-वाक्यक फलवत्ता आ भाषा-दर्शन
निषेध-मीमांसा आ जीवन्मुक्ति
अनुवाद-सिद्धान्त, भाषा-रणनीति आ देशज मुहावरा
मैथिली वाङ्मयमे विदेह आ गजेन्द्र ठाकुरक योगदान
भावी संस्करणक लेल सम्पादकीय विमर्श
समग्र मूल्याङ्कन
अध्याय २ : विस्तृत दार्शनिक, अनुवाद-समीक्षात्मक आ साहित्यिक समीक्षा
१. ग्रन्थ-परिचय आ समीक्ष्य पाठक स्वरूप
२. मङ्गलाचरणक समीक्षा
३. अध्यास-प्रकरण: शाङ्कर उपोद्घातपर वाचस्पतिक टीकाक अनुवाद
३.१ पूर्वपक्षक भव्य निर्माण: आत्मा जिज्ञासाक विषय नहि
३.२ श्रुति-प्रत्यक्ष-विरोधक समाधान
३.३ अध्यास-लक्षण आ ख्यातिवाद-विमर्श
३.४ अनिर्वचनीयख्यातिक स्थापना
३.५ आत्माक स्वयंप्रकाशता-विमर्श
३.६ अविषय आत्मापर अध्यास: आकाश-दृष्टान्त आ जीवभाव
३.७ अविद्या-लक्षण, प्रमाण-प्रवृत्ति आ पशु-साम्य
४. प्रथम सूत्र: "अतः आब ब्रह्म केँ जानबाक इच्छा" (अथातो ब्रह्मजिज्ञासा)
४.१ "अथ" पदक मीमांसा
४.२ कर्मज्ञानानन्तर्यक खण्डन आ कर्मक वास्तविक स्थान
४.३ साधन-चतुष्टय आ "अतः" पद
४.४ "ब्रह्मणः" पदक समास-मीमांसा आ जिज्ञासाक विषय
५. द्वितीय सूत्र: "जाहिसँ एहि जगतक जन्म आदि होइत अछि" (जन्माद्यस्य यतः)
६. तृतीय सूत्र: "शास्त्रक स्रोत होयबाक कारण" (शास्त्रयोनित्वात्)
७. चतुर्थ सूत्र: "परन्तु ओ, समन्वयक कारण" (तत्तु समन्वयात्)
७.१ पूर्वपक्ष: वेदक कार्यपरता
७.२ समन्वयसँ स्वतन्त्र प्रामाण्य
७.३ मोक्षक नित्यता: चतुर्विध कार्यताक निरास
७.४ ज्ञान वस्तुतन्त्र, विधिच्छाया आ सिद्धवस्तु-वाक्यक फलवत्ता
७.५ निषेध-मीमांसा आ गौण-मिथ्या-विवेक
८. भामती-प्रस्थानक वैशिष्ट्य: एहि अंशमे यथोपलब्ध
९. अनुवाद-कला आ भाषा-वैभव
१०. भारतीय आ पाश्चात्य समीक्षा-दृष्टिसँ मूल्याङ्कन
११. मैथिली वाङ्मय आ विदेह-सन्दर्भमे स्थान
१२. किछु निरीक्षण आ सुझाव
१३. उपसंहार
१४. समग्र निर्णय
अध्याय ३ : परिशिष्ट: भामतीक शुद्ध मैथिली अनुवाद
अध्यास
अतः आब ब्रह्म केँ जानबाक इच्छा
जाहिसँ एहि जगतक जन्म आदि होइत अछि
शास्त्रक स्रोत होयबाक कारण
परन्तु ओ, समन्वयक कारण
एतय चतुःसूत्री-भामती समाप्त होइत अछि।
अध्याय ४ : विस्तृत बिबलियोग्राफी
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