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गॉव के पूरब वाले पुराने कुएँ पर जब ओस जमती थी तो वह केवल पानी की सतह पर नहीं ठहरती थी बल्कि मानो सदियों पुरानी मर्यादाओं और दो अलग अलग टोलों के बीच खड़ी अदृश्य दीवार को भी अपने भीतर समेट लेती थी उस सुबह भी गाँव में रोज की तरह चूल्हों से उठता धुआँ हवा में घुल रहा था और बैलों की गलों में बँधी घंटियों की आवाज सन्नाटे को धीरे धीरे तोड़ रही थी 20 वर्ष का फूकन अपने माँ के कहने पर उसी पुराने कुएँ से पानी भरने निकला था उसे क्या पता था कि उस सुबह पानी से भरी बाल्टी के साथ उसकी किस्मत में कुछ और भी लिखा था कुएँ की काई लगी ठंडी मुंडेर पर उस दिन पहली बार कुसुम भी खड़ी थी उसने सादा नीला सूती वस्त्र पहन रखा था उसकी आँखों में एक अजीब सी शांति थी जैसे वह इस गाँव की हलचल से अलग अपनी ही किसी दुनिया में खड़ी हो न फूकन ने कुछ कहा न कुसुम ने न कोई मुस्कान थी न कोई पहचान बस एक पल के लिए दोनों की निगाहें मिलीं और फिर ठहर गई वह केवल एक क्षण था बिल्कुल शांत बिल्कुल साधारण लेकिन उसी एक पल की खामोशी ने गाँव की दो अलग अलग दुनियाओं के बीच एक ऐसा धागा बॉघ दिया जिसे आने वाला समय ही तोड़ सकता था
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