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Chalo Tumhe Main Ghar Chhod Deta Hu | चलो तुम्हें मैं घर छोड़ देता हूँ

Gaurav S Kaintura
Type: Print Book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹210 + shipping
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Description

There is a dialogue that comes in the popular film 'Il Postino: The Postman' (1994) that a poetry does not belong to those who write it but it belongs to those who need it. In the same way, poetry entered my life. Whatever poetry I read, it held me sometimes and sometimes it left me free. Not every person can understand poetry but it is present in our life in some or the other form and when it appears before us, it feels like as if all the mystic secrets have been revealed so naturally and nothing is left to ponder upon. If man is a pure consciousness then poetry is a way of its expansion. Poetry is a beautiful hymn of the emotions carved on the canvas of human mind. A voice of our inner heart which we know of but do not express so often, we see it around but don't identify with it at that time.
This is my first poetry collection. There are few poetry and some stories in the form of the poetry and simple thoughts. I'm very excited now to present it before you. I hope you will shower your generous love to it and share your feedback.
— Gaurav S Kaintura

एक विख्यात फ़िल्म (दि पोस्टमैन, 1994) के एक संवाद में यह बात आती है, कि कविता उनके लिए नहीं बनी होती जो उसे लिखते है, बल्कि ये उनके लिए बनी होती है जिन्हें इसकी जरूरत होती है। कुछ इसी तरह कविताओं ने मेरे जीवन में प्रवेश किया। मैंने जिन जिन कविताओं को पढ़ा उन्होंने मुझे कभी बाँधे रखा तो कभी मुक्त छोड़ दिया। हर कोई व्यक्ति कविता नहीं समझ सकता लेकिन हम सब के जीवन में कहीं न कहीं किसी न किसी रूप में वो मौजूद होती है। और जब वो हमसे मिलती है तो ऐसा लगता है जैसे सारे रहश्य स्वतः उद्घटित हो गए हों और कुछ बाकी न रह गया हो। मानव अगर शुद्ध चेतना है तो कविता उस चेतना के विस्तार का माध्यम है। कविता, व्यक्ति के मानस पटल पर अंकित भावों का संगीत है। हमारे अंतर मन की आवाज़ है जिसे हम जानते तो है लेकिन उसे कभी कह नहीं पाते, हम देखते तो है, मगर पहचानते नहीं है।
यह मेरा पहला कविता संग्रह है। इसमें मेरी लिखी कुछ कविताएँ है, कविता के रूप में कहीं कहीं पर लघु कहानियाँ भी है, और कुछ सादे विचार है। इन्हें इतने दिनों तक सहेज कर रखने में और अब आपके सामने इसे प्रस्तुत करने में मुझे बहुत ही आनंद हो रहा है। आशा करता हूँ आप इन्हें अपना भरपूर प्यार देंगे और अपनी प्रतिक्रियाएं साझा करेंगे।
— गौरव सिंह कैन्तुरा

About the Author

Gaurav S Kaintura is an Indian writer. He writes poetry, short-stories and motivational columns. He is the author of an anthology known as 'A Silent Figure.' His second book, a collection of Hindi poetry is out now.

गौरव सिंह कैन्तुरा (जन्म: 1998) नई पीढ़ी के एक युवा लेखक हैं। वो मूल उत्तराखंड, टिहरी गढ़वाल के रहने वाले है। उनका जन्म नई दिल्ली में हुआ और वहीं से अपनी प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई हरिद्वार स्थित गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय से प्राप्त की। संगणक विज्ञान अभियांत्रिकी में अपनी स्नातक की शिक्षा प्राप्त करने के बाद वह अभी अपनी नई पुस्तक पर कार्य कर रहे हैं। लेखन के साथ साथ क्लासिक सिनेमा और कथा भजन संगीत में भी उनकी रूचि है।

Book Details

ISBN: 9781637543122
Publisher: Gaurav S Kaintura
Number of Pages: 131
Dimensions: 5"x8"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

Ratings & Reviews

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