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श्रीमद्भगवद्गीता: एक व्यावहारिक मार्ग
खण्ड 1 — मूलभूत सिद्धांत (प्रारंभिक चरण)
भगवद्गीता की 164 जीवन-परिवर्तनकारी शिक्षाओं पर आधारित आधुनिक जीवन के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका।
क्या भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ है, या यह आज के जीवन की चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान भी प्रदान करती है?
यह पुस्तक आपको भगवद्गीता को केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उसे अपने दैनिक जीवन में समझने, अपनाने और लागू करने के लिए आमंत्रित करती है।
"श्रीमद्भगवद्गीता: एक व्यावहारिक मार्ग" श्रृंखला का यह पहला खण्ड भगवद्गीता से चुनी गई 164 मूलभूत शिक्षाओं के माध्यम से आपके मन, स्वभाव, आदतों, भय, निर्णयों और जीवन की दिशा को समझने का एक स्पष्ट एवं व्यवस्थित मार्ग प्रस्तुत करता है।
यह पुस्तक केवल श्लोकों का अनुवाद नहीं है। प्रत्येक शिक्षा को आधुनिक जीवन की परिस्थितियों से जोड़ते हुए सरल, व्यावहारिक और जीवनोपयोगी रूप में प्रस्तुत किया गया है, ताकि विद्यार्थी, युवा, पेशेवर, गृहस्थ, नेतृत्वकर्ता तथा आध्यात्मिक साधक—सभी इससे लाभान्वित हो सकें।
इस पुस्तक में आप जानेंगे—
• अपने मन और स्वभाव को बेहतर ढंग से समझना
• भय, भ्रम और आत्म-संदेह पर विजय प्राप्त करना
• अनुशासन, एकाग्रता और मानसिक दृढ़ता विकसित करना
• उद्देश्यपूर्ण और संतुलित जीवन जीना
• कर्म, कर्तव्य और निर्णयों में स्पष्टता प्राप्त करना
• प्राचीन ज्ञान को आधुनिक जीवन में व्यावहारिक रूप से लागू करना
इस पुस्तक की विशेषताएँ
• भगवद्गीता की 164 जीवन-परिवर्तनकारी शिक्षाएँ
• सरल और सहज हिन्दी भाषा
• प्रत्येक विषय का आधुनिक संदर्भ सहित व्यावहारिक विश्लेषण
• आत्म-विकास, व्यक्तित्व निर्माण और मानसिक संतुलन के लिए उपयोगी
• व्यक्तिगत, पारिवारिक, व्यावसायिक और आध्यात्मिक जीवन के लिए समान रूप से प्रासंगिक
यह पुस्तक "जीवन के लिए एक सम्पूर्ण मार्गदर्शन श्रृंखला" का प्रथम खण्ड है। आगामी खण्डों में व्यक्तित्व विकास, भावनात्मक संतुलन, छात्र जीवन, पारिवारिक जीवन, नेतृत्व, नैतिकता, कर्मयोग, भक्ति, आत्मज्ञान तथा जीवन के अन्य महत्वपूर्ण आयामों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
यदि आप भगवद्गीता को केवल एक धार्मिक ग्रंथ के रूप में नहीं, बल्कि जीवन को समझने और उसे श्रेष्ठ बनाने की एक व्यावहारिक प्रणाली के रूप में जानना चाहते हैं, तो यह पुस्तक आपके लिए है।
पढ़ें। मनन करें। जीवन में अपनाएँ। स्वयं को रूपांतरित करें।
लेखक: गोपाल अच्युत दास
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