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सनातन ज्ञान की पवित्रता को अक्षुण्ण रखते हुए, यह संस्करण किसी भी आधुनिक, मनगढ़ंत या वामपंथी व्याख्या से सर्वथा मुक्त है। मैकाले की शिक्षा प्रणाली के दूषित दृष्टिकोण को नकारते हुए, यह विशुद्ध 'शब्द-प्रति-शब्द' (Word-by-word) अनुवाद पाठकों को बिना किसी मध्यस्थ की विचारधारा के, सीधे महर्षि वेदव्यास द्वारा लिपिबद्ध ईश्वरीय वाणी से जोड़ता है।
इस पुस्तक में प्रयुक्त हिंदी शब्दावली को पूर्णतः शुद्ध, औपचारिक और अकादमिक स्तर का रखा गया है, ताकि सनातन ज्ञान की पवित्रता और उसकी गंभीरता अक्षुण्ण रहे। एक शब्दशः अनुवाद पाठक को यह स्वतंत्रता देता है कि वह सीधे ईश्वरीय वाणी का साक्षात्कार कर सके।
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