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सफ़र ही सिला है

“कुछ रास्ते मंज़िल तक नहीं, खुद तक ले जाते हैं।”
Gourav Kumar
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction
Language: Hindi
Price: ₹399 + shipping
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Description

"वहाँ कोई सवाल नहीं पूछता सुहाना। वहाँ कोई ये नहीं देखता कि तुम्हारे पास कौन सी गाड़ी है, तुम्हारी सैलरी का स्लैब क्या है, या तुम किस पद पर बैठे हो। जब आप किसी अनजान मोड़ पर खड़े होते हैं ना, तो पहाड़ आपकी हैसियत नहीं, आपकी रूह का वज़न नापते हैं। शहर में हम जो मुखौटे पहनकर घूमते हैं, वो पहली ही ठंडी हवा के झोंके में उड़ जाते हैं। वहाँ सिर्फ तुम बचते हो... बिल्कुल साफ़, बिल्कुल सच।"
हम सब अपनी ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा उन चीज़ों को कमाने में गँवा देते हैं, जो कभी हमारी थीं ही नहीं—सैलरी स्लिप्स पर छपे बेजान अंक, काँच के केबिनों में टँगी झूठी मुसकानें और वो खोखली पहचान जिसे हम अपना नाम समझ बैठे हैं। आठवें फ़्लोर की एयर-कंडीशंड ठंडक में साँसें तो चलती हैं, पर दिल कब का धड़कना भूल चुका होता है।
यह दास्तान सिर्फ़ कबीर, सुहाना और मीरा की नहीं है; यह उस दबे हुए सवाल की गूँज है जो हर रोज़ आपके भीतर भी चीखता है—क्या आप सच में जी रहे हैं, या सिर्फ़ तारीखें बदल रहे हैं?
अगर कभी किसी शहर के ट्रैफ़िक में फँसकर, अपनी उँगलियों को स्टीयरिंग पर भींचते हुए आपने दूर धुंध में किसी पहाड़ को याद किया है... अगर कभी किसी भरी महफ़िल में भी खुद को बेहद तन्हा पाया है... तो यह किताब आपके उसी अनकहे दर्द का आईना है।
पन्ने पलटिए, क्योंकि यह किसी कहानी की शुरुआत नहीं, उस पिंजरे को तोड़कर अपनी रूह को वापस पाने की पहली परवाज़ है।

About the Author

पेशे से कॉरपोरेट की रफ़्तार और तकनीकी पेचीदगियों को करीब से देखने वाले गौरव कुमार के भीतर हमेशा से एक बेपरवाह मुसाफ़िर सांस लेता रहा है। आठवें फ़्लोर की काँच की दीवारों, डेडलाइन्स और अंतहीन बैठकों के बीच उन्होंने ज़िंदगी के उस हिस्से को गहराई से महसूस किया है जो अक्सर कैलेंडर और फाइलों के दबाव में कहीं खो जाता है।

गौरव की कहानियों की ताक़त उनके अपने अनुभवों, अधूरी छूटी इच्छाओं और इंसानी जज़्बातों की सूक्ष्म समझ में है। पहाड़ों की कच्ची पगडंडियाँ, चाय की गुमनाम टपरियाँ, बुलेट के साइलेंसर की धड़कन और शहरों की दमघोंटू खामोशी—ये सब उनके लेखन का अभिन्न हिस्सा हैं। वे इंसानी रिश्तों को किसी बनी-बनाई परिपाटी पर नहीं तौलते, बल्कि उन्हें उनके सबसे सच्चे, नाज़ुक और अनकहे रूप में कागज़ पर उतारते हैं।

'सफ़र ही सिला है' गौरव कुमार की सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि हर उस इंसान के नाम एक पुकार है जो एक तयशुदा ढर्रे में घुटते हुए भी अपनी खुली वादियों, सच्चे इश्क़ और असली आज़ादी की तलाश में है। जब गौरव लिख नहीं रहे होते, तब वे अक्सर धौलाधार के किसी अनजान मोड़ पर अपने बैकपैक के साथ नए रास्तों की तलाश में मिल जाते हैं।

Book Details

ISBN: 9789334521429
Publisher: Pothi
Number of Pages: 129
Dimensions: 8.00"x11.00"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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