You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
रवि हरियाणा का किसान है। पाँच एकड़। दो बच्चे। बाऊजी जिनका हाथ लकवे ने छीन लिया।
एक दिन एक पुराना फ़ोन आता है — एक सौ उनचास रुपये, अनलिमिटेड।
पहले मनोरंजन। फिर तुलना। फिर रात दो बजे। फिर सुबह वही। दूसरों का खेत हरा दिखता है, अपना सूखता जाता है। चौपाल ख़ाली। घर में चार लोग, चार स्क्रीन, चार चुप्पियाँ।
तन लाखों साल पुराना। स्क्रीन पल भर की। बीच में — एक किसान जो समझ नहीं पा रहा कि जाल कहाँ है।
जाल उस लड़ाई की कहानी है जो हम सब लड़ रहे हैं — बस अपने-अपने खेत में।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book Jaal.