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वो बचपन फिर कभी नहीं आया
लेखक: हरीश लोदवाल
क्या आपको अपना बचपन याद है?
वो मिट्टी में खेलना, छोटे-छोटे खिलौनों से बड़ी खुशियाँ पाना, स्कूल की घंटी का इंतज़ार करना, दोस्तों के साथ हँसना और शाम होते ही माँ की आवाज़ सुनकर घर लौट आना...
वो दिन कितने खूबसूरत थे, जब खुश रहने के लिए पैसों की नहीं, बस अपनों के साथ की जरूरत होती थी।
“वो बचपन फिर कभी नहीं आया” एक ऐसी भावनात्मक किताब है, जो आपको आपके बीते हुए दिनों की उन गलियों में ले जाएगी, जहाँ आपकी मासूमियत, आपकी शरारतें और आपकी छोटी-छोटी खुशियाँ आज भी यादों में जीवित हैं।
इस किताब के पन्नों में आपको मिलेगा—
- बचपन की मासूम दुनिया और मिट्टी में छिपी खुशियाँ।
- माँ के प्यार, उसके आँचल और उसकी आवाज़ की यादें।
- स्कूल, दोस्तों, भाई-बहन और पुरानी शरारतों के अनमोल पल।
- छोटे-छोटे खिलौनों में छिपी बड़ी खुशियाँ।
- समय के साथ बदलते रिश्ते और जिम्मेदारियों का एहसास।
- दिल को छू लेने वाली भावनाएँ और मौलिक दर्द भरी शायरी।
यह किताब सिर्फ बचपन की यादों का संग्रह नहीं, बल्कि उन भावनाओं की कहानी है जिन्हें हम बड़े होते-होते कहीं पीछे छोड़ देते हैं।
इसे पढ़ते हुए शायद आपको अपना पुराना घर याद आए, माँ की पुकार सुनाई दे, किसी बिछड़े दोस्त का चेहरा सामने आ जाए या आँखों में वह बचपन उतर आए, जिसे आप दोबारा जीना चाहते हैं।
क्योंकि जिंदगी में बहुत कुछ वापस मिल सकता है, लेकिन बीता हुआ बचपन कभी वापस नहीं आता।
अगर आप भी कभी अपने बचपन को याद करके मुस्कुराए हैं या आपकी आँखें नम हुई हैं, तो यह किताब आपके दिल के बहुत करीब होगी।
कुछ यादें कभी पुरानी नहीं होतीं, बस उन्हें याद करने वाला दिल थोड़ा बड़ा हो जाता है।
लेखक: हरीश लोदवाल
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