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संस्कृत वर्णमाला के इक्यावन अक्षरों की तरह, यह संग्रह इक्यावन कविताओं की एक यात्रा है। हर कविता एक अक्षर है, हर अक्षर एक अनुभव।
आठ खंडों में पिरोई गई ये कविताएं जीवन के विभिन्न रंगों को छूती हैं , यात्रा और स्थान, रिश्ते और भावनाएं, आत्मचिंतन, समय और अस्तित्व, समाज और संसार, प्रकृति और तत्व, कला शब्द और रचना, और अध्यात्म व दर्शन। कहीं नॉस्टैल्जिया है, कहीं दर्शन। कहीं ठहराव, कहीं बहाव। कहीं किसी पुरानी गली की धूल है, कहीं किसी अनजान शाम की चुप्पी। ये कविताएं किसी शास्त्रीय परंपरा का अनुकरण नहीं करतीं बल्कि व्यक्तिगत अनुभवों, ठोस क्षणों, और जीवन के छोटे-छोटे विवरणों से जन्मी हैं।
जो पाठक मुक्त छंद में बही हुई, भावनात्मक रूप से सच्ची, और दार्शनिक रूप से गहरी हिन्दी कविता पढ़ना चाहते हैं , उनके लिए "इक्यावन अक्षर" एक ऐसी किताब है जिसे एक बार में पूरा पढ़ा जा सकता है, या जिसके किसी भी पन्ने को रात के किसी शांत क्षण में खोला जा सकता है। हर पन्ना एक नया अक्षर। हर अक्षर एक नई शुरुआत।
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