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अधूरा इश्क़ — अनकही मोहब्बत के अल्फ़ाज़
कुछ मोहब्बतें मुकम्मल होकर भी दिल में नहीं उतरतीं,
और कुछ अधूरी रहकर भी पूरी ज़िंदगी साथ चलती हैं।
“अधूरा इश्क़” एकतरफ़ा मोहब्बत के उन जज़्बातों की दास्तान है,
जो अक्सर दिल में रह जाते हैं और शब्दों में पूरी तरह उतर नहीं पाते।
यह किताब कशिश, एहसास, उम्मीद, लगाव, खामोशी, तड़प और आख़िर में क़ुबूलियत तक के उस सफ़र को शायरी और कविताओं के माध्यम से पिरोती है, जिससे शायद हर वह इंसान कभी न कभी गुज़रा है जिसने किसी को बिना पाए दिल से चाहा हो।
इन पन्नों में कहीं मासूम मोहब्बत है, कहीं इंतज़ार की बेचैनी,
कहीं ख़ामोश इज़हार है, तो कहीं टूटकर भी मुस्कुराने की कोशिश।
कुछ शायरियाँ हल्की मुस्कान देती हैं, कुछ दिल को गहराई तक छू जाती हैं।
यह सिर्फ़ प्रेम की कहानी नहीं,
बल्कि उन खामोश एहसासों की आवाज़ है जिन्हें अक्सर लोग अपने भीतर दबाए जीते रहते हैं।
अगर आपने कभी किसी को दूर से चाहा है…
अगर किसी की याद ने आपको शायर बना दिया है…
अगर अधूरी मोहब्बत ने आपको खुद से मिलवाया है…
तो शायद यह किताब आपको अपनी सी लगे।
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