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मन के स्वर

मुस्कान, दर्द, विस्मय और बदलाव के गीत
Jitendra Pant
Type: Print Book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹250 + shipping
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Description

गीत हमेशा संगीत से पैदा नहीं होते।
कभी कोई अनुभव गीत बन जाता है।
कभी कोई पीड़ा। कभी कोई प्रश्न।
कभी कोई विस्मय। कभी कोई व्यवस्था देखकर उपजा आक्रोश। और कभी-कभी कोई ऐसी स्थिति, जिस पर रोना चाहिए या हँसना—समझ नहीं आता—तो वह व्यंग्य बन जाती है।

इन गीतों की शुरुआत भी कुछ ऐसी ही है।

मैंने जीवन के अलग-अलग पड़ावों पर बहुत कुछ देखा—व्यवसाय, प्रबंधन, शिक्षा, समाज, लोगों की समस्याएँ, सरकारी व्यवस्था की विसंगतियाँ, व्यक्तिगत संघर्ष, उम्र का बदलता शरीर, neuro myelopathy और उससे उत्पन्न परेशानियाँ।

इन गीतों के पीछे एक और निरंतर चलने वाली भावना है—और अधिक जानने की इच्छा। जितना इस सृष्टि को देखने और समझने की कोशिश करता हूँ, उतना ही महसूस होता है कि हम कितना कम जानते हैं। ब्रह्मांड की विराटता, प्रकृति की अद्भुत रचना, जीवन का रहस्य और अस्तित्व की अनंत यात्रा आज भी मेरे लिए विस्मय का विषय हैं। शायद इसी कारण मन बार-बार प्रश्न करता है, सीखना चाहता है और उस अद्भुत सृष्टि के रहस्यों को थोड़ा और समझना चाहता है।

विस्मय मेरे लिए केवल आश्चर्य नहीं, सीखने की शुरुआत है। कोई नया प्रश्न जन्म ले, कोई अनदेखी बात दिखाई दे, किसी साधारण घटना में असाधारण कुछ दिख जाए—तो मन फिर एक नई यात्रा पर निकल पड़ता है। शायद यही यात्रा इन गीतों में भी दिखाई देती है।

शब्द पहले भी लिखता रहा हूँ। किताबें भी लिखीं। विचार भी साझा किए। लेकिन गीत लिखना एक अलग अनुभव है।
गीत में विचार को तर्क की तरह समझाना नहीं पड़ता। उसे महसूस कराया जा सकता है।

इसीलिए कभी एक गंभीर सामाजिक प्रश्न कुछ पंक्तियों में उतर आया, कभी दर्द में हास्य घुल गया, कभी प्रकृति से संवाद होने लगा और कभी मन ने स्वयं से कहा—
चलते रहो। चरैवेति।

इन गीतों में कोई एक शैली नहीं है।
कुछ गीत सरल हैं। कुछ व्यंग्यात्मक।
कुछ दार्शनिक। कुछ सामाजिक। कुछ व्यक्तिगत। कुछ प्रार्थना जैसे। और कुछ केवल मुस्कुराने के लिए।

लेकिन इनके पीछे एक धागा समान है—
जीवन को केवल जीना नहीं, देखना भी है।
देखना ही नहीं, समझना भी है।
और समझना ही नहीं, जहाँ आवश्यक हो वहाँ बदलने की कोशिश भी करनी है।

यह पुस्तक उसी यात्रा का एक संगीतमय दस्तावेज़ है।

About the Author

जितेंद्र पंत मार्गदर्शक, प्रशिक्षक और जीवन-प्रेरक हैं। आईआईटी दिल्ली से मकैनिकल इंजीनियरिंग मे १९७२ मे शिक्षा प्राप्त करने के बाद इंडस्ट्री और कन्सल्टन्सी मे अनुभाव प्राप्त किया। चार दशकों से अधिक के अपने बहुआयामी कार्यजीवन में उन्होंने ऑपरेशंस प्रबंधन, गुणवत्ता, काइज़ेन, परियोजना प्रबंधन, समस्या-समाधान और प्रशिक्षण के क्षेत्र में कार्य किया है। उन्होंने भारत के साथ-साथ जापान, दक्षिण कोरिया, केन्या, इंग्लैंड और स्कॉटलैंड में assignments किए है।

वे स्वयं को आजीवन विद्यार्थी मानते हैं और आज भी लिखने, पढ़ने, सिखाने, मार्गदर्शन करने और नए अनुभवों से सीखने में सक्रिय हैं। उनका विश्वास है—
सीखना कभी बंद नहीं होना चाहिए और जीवन में मुस्कुराने का कारण हमेशा खोजते रहना चाहिए।

जितेंद्र अब तक 22 पुस्तकें लिख चुके हैं। उनके लेखन में प्रबंधन और उत्पादकता के साथ-साथ जीवन के अनुभव, छोटे-छोटे प्रसंग, आत्मचिंतन, हास्य और जीवन से मिलने वाली सीख प्रमुख हैं। उनकी लेखन शैली सरल और सीधे अनुभवों से जुड़ी है।

वे JMPS Health & Education Care Foundation के माध्यम से शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सामाजिक पहलों में भी योगदान दे रहे हैं।

उनकी पुस्तकों में 5S, Time Management, Problem Solving, 25 Lessons from Uncommon Thoughts, Nano Insights, Operations Management Demystified, Kaizen Catalyst, Anyone Who Can Walk Is My Fitness Hero, Born Again at 75, Doing, Don’t Blame, Go to Gemba, Cut Cost at Every Cost, Wisdom in Verse, और Winning at Tortoise Pace सहित अनेक पुस्तकें शामिल हैं।

उनके लेखन में उनके परिवार, विशेषकर दादा और नाना के रूप में अपने अनुभवों, जीवन के प्रति जिज्ञासा और बदलती परिस्थितियों को स्वीकार करते हुए आगे बढ़ने की भावना की झलक भी मिलती है।

लेखन, सीखना, सिखाना और मुस्कुराना—जितेंद्र के लिए जीवन के इसी निरंतर सफ़र के अलग-अलग रूप हैं।

Book Details

Publisher: Self published
Number of Pages: 166
Dimensions: 5.00"x7.99"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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