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Bheri Akbarpur Ki Jadein Aur Jajbaat

Kavi Ram kumar Ranolia
Type: Print Book
Genre: History
Language: Hindi
Price: ₹299 + shipping
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Description

*‘भेरी अकबरपुर की जड़ें, जज़्बात और हालात’ — अपनी मिट्टी, स्मृतियों और इतिहास से जुड़ने की आत्मीय यात्रा*

‘भेरी अकबरपुर की जड़ें, जज़्बात और हालात’ कवि रामकुमार रानोलिया की ऐसी पुस्तक है, जो केवल एक गाँव के इतिहास को दर्ज करने का प्रयास नहीं करती, बल्कि भेरी गाँव से जुड़े लोगों की स्मृतियों, संस्कारों, संघर्षों और भावनात्मक रिश्तों को भी सहेजती है। पुस्तक को पढ़ते हुए महसूस होता है कि लेखक ने भेरी अकबरपुर को बाहर से देखने के बजाय अपनी मिट्टी से जुड़े व्यक्ति की दृष्टि से समझने और प्रस्तुत करने की कोशिश की है।
पुस्तक की भूमिका से स्पष्ट होता है कि लेखक के लिए भेरी गाँव का इतिहास केवल तिथियों, घटनाओं और नामों का संकलन नहीं है। उनके लिए इतिहास उन लोगों की जिंदगी में भी मौजूद है, जिन्होंने अपने श्रम, संघर्ष और सहयोग से भेरी अकबरपुर को आकार दिया। भेरी अकबरपुर की उत्पत्ति, बसावट, सामाजिक जीवन, कृषि, रहन-सहन, धार्मिक आस्थाओं, त्योहारों और ग्रामीण परंपराओं को सामने लाने का प्रयास पुस्तक को एक आत्मीय स्वर देता है।
इस पुस्तक की सबसे अच्छी बात इसका भेरी के लोकजीवन से जुड़ाव है। भेरी के बुजुर्गों की स्मृतियाँ और पुरानी पीढ़ियों से चली आ रही बातें भेरी की वास्तविक पहचान हैं। लेखक ने इन्हीं बिखरी हुई स्मृतियों को एक जगह संजोने का प्रयास किया है। आज जब भेरी जैसे गाँव तेजी से बदल रहे हैं और पुरानी जीवन-शैली तथा परंपराएँ धीरे-धीरे पीछे छूट रही हैं, ऐसे प्रयास का महत्व और बढ़ जाता है।
समर्पण के पृष्ठ से लेकर भूमिका तक लेखक का भेरी, अपने माता-पिता, परिवार और अपनी जन्मभूमि के प्रति लगाव दिखाई देता है। यही आत्मीयता पुस्तक को महज एक ऐतिहासिक विवरण बनने से बचाती है। इसमें एक ऐसे व्यक्ति की भावनाएँ दिखाई देती हैं, जो भेरी की जड़ों को भूलना नहीं चाहता और आने वाली पीढ़ी को भेरी की कहानी से जोड़ना चाहता है।
कुल मिलाकर, ‘भेरी अकबरपुर की जड़ें, जज़्बात और हालात’ भेरी की मिट्टी, भेरी के लोगों और भेरी की स्मृतियों को शब्दों में सुरक्षित रखने का एक ईमानदार प्रयास है। यह पुस्तक विशेष रूप से भेरी अकबरपुर और आसपास के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भावनात्मक महत्व रखती है। स्थानीय इतिहास और ग्रामीण संस्कृति में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए भी यह एक उपयोगी दस्तावेज़ साबित हो सकती है। यह पुस्तक पढ़ते हुए केवल भेरी अकबरपुर का इतिहास नहीं मिलता, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने की एक सच्ची भावना भी महसूस होती है।

पुस्तक विवरण
शीर्षक: भेरी अकबरपुर की जड़ें, जज़्बात और हालात
लेखक: कवि रामकुमार रानोलिया
प्रकाशक: प्रज्ञानशाला, आर.के. फीचर्स प्रकाशन (पंजीकृत), भिवानी (हरियाणा)
प्रथम संस्करण: 2026
ISBN: 978-81-998925-0-7
मूल्य: ₹299/-
कॉपीराइट: © 2026 — कवि रामकुमार रानोलिया द्वारा सुरक्षित
भाषा: हिंदी
विधा/स्वरूप: ग्रामीण इतिहास, संस्मरण, लोक-संस्कृति एवं सामाजिक दस्तावेज़

— डॉ. सत्यवान सौरभ
पीएचडी (राजनीति विज्ञान), कवि एवं सामाजिक विचारक
333, परी वाटिका, कौशल्या भवन,
बड़वा (सिवानी), भिवानी, हरियाणा – 127045
मोबाइल: 9466526148, 01255281381

(डॉ. सत्यवान सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), एक कवि और सामाजिक विचारक है।)

About the Author

ग्रामीण पृष्ठभूमि के संघर्षशील रचनाकार : रामकुमार रानोलीया
ग्रामीण परिवेश से निकलकर साहित्य, समाजसेवा और जनजागरण के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले श्री रामकुमार रानोलीया संघर्ष, कर्मठता और सामाजिक समर्पण के प्रतीक हैं। उनका जन्म 14 फरवरी 1954 को हरियाणा के हिसार जिले के गांव भीर अकबरपुर में माता श्रीमती द्वारका देवी और पिता श्री तोराराम के घर हुआ। इनकी पहली पत्नी श्रीमती हरिया देवी, व दूसरी पत्नी श्रीमती कृष्णा देवी। इनकी पुत्री का नाम किरण रानोलीया तथा इनके पुत्र का नाम बिरेंद्र रानोलीया है। रानोलीया बचपन से ही मेधावी और सामाजिक गतिविधियों में रुचि रखने वाले छात्र रहे हैं। उनकी प्रतिभा को देखते हुए प्राथमिक शिक्षा के दौरान उन्हें एक वर्ष में दो कक्षाएं उत्तीर्ण करने का अवसर प्रदान किया गया।

दसवीं शिक्षा उकलाना मंडी से प्राप्त करने के बाद उन्होंने दयानंद महाविद्यालय, हिसार में अध्ययन किया तथा नरवाना आईटीआई से कारपेंटर प्रशिक्षण लिया। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से मुर्गी पालन का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। एनसीसी में निशानेबाजी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल कर उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।

समाज सेवा के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। वर्ष 1976 में जिला कुम्हार सभा, हिसार के प्रथम गठन पर उन्हें सचिव चुना गया। उन्होंने युवाओं के मार्गदर्शन, सामाजिक विवादों के समाधान तथा समाज में जागरूकता फैलाने के लिए निरंतर कार्य किया। साक्षरता अभियान, शांति समितियों और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में उनकी सक्रिय भागीदारी रही।

रामकुमार रानोलीया को बचपन से ही साहित्य सृजन का शौक था। वर्ष 1974 में उनकी पहली पुस्तक ‘अपने ही दर्पण में’ प्रकाशित हुई। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने लेखन और सामाजिक कार्यों का सिलसिला कभी नहीं छोड़ा। देश के विभिन्न राज्यों की अनेक कवि गोष्ठियों में भाग लेते हुए उन्होंने साहित्य को समाज परिवर्तन का माध्यम बनाया।

वर्ष 1994 के पंचायत चुनाव में पूरे गांव ने उन्हें सरपंच बनाने का निर्णय लिया था, किंतु पद महिला गांव के लिए आरक्षित होने के कारण उनकी धर्मपत्नी श्रीमती हरिया देवी सरपंच चुनी गईं। उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन में गांव में विकास के अनेक कार्य हुए, जिनकी आज भी सराहना की जाती है।

माननीय राष्ट्रपति पर लिखी उनकी कविता से प्रभावित होकर राष्ट्रपति परिवार की ओर से उन्हें विशेष आमंत्रण एवं सम्मान प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बनी।

आज भी रामकुमार रानोलीया अपनी लेखनी के माध्यम से समाज, संस्कृति और गांव के इतिहास को संजोने में लगे हुए हैं। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि दृढ़ संकल्प, समाजसेवा और साहित्य साधना से साधारण व्यक्ति भी असाधारण पहचान बना सकता है।

— डॉ. प्रियंका सौरभ

कवयित्री, सामाजिक विचारक एवं स्तंभकार

Book Details

ISBN: 9788199892507
Publisher: Pragyanshala RK Features Publications Bhiwani Haryana INDIA
Number of Pages: 146
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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