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*‘भेरी अकबरपुर की जड़ें, जज़्बात और हालात’ — अपनी मिट्टी, स्मृतियों और इतिहास से जुड़ने की आत्मीय यात्रा*
‘भेरी अकबरपुर की जड़ें, जज़्बात और हालात’ कवि रामकुमार रानोलिया की ऐसी पुस्तक है, जो केवल एक गाँव के इतिहास को दर्ज करने का प्रयास नहीं करती, बल्कि भेरी गाँव से जुड़े लोगों की स्मृतियों, संस्कारों, संघर्षों और भावनात्मक रिश्तों को भी सहेजती है। पुस्तक को पढ़ते हुए महसूस होता है कि लेखक ने भेरी अकबरपुर को बाहर से देखने के बजाय अपनी मिट्टी से जुड़े व्यक्ति की दृष्टि से समझने और प्रस्तुत करने की कोशिश की है।
पुस्तक की भूमिका से स्पष्ट होता है कि लेखक के लिए भेरी गाँव का इतिहास केवल तिथियों, घटनाओं और नामों का संकलन नहीं है। उनके लिए इतिहास उन लोगों की जिंदगी में भी मौजूद है, जिन्होंने अपने श्रम, संघर्ष और सहयोग से भेरी अकबरपुर को आकार दिया। भेरी अकबरपुर की उत्पत्ति, बसावट, सामाजिक जीवन, कृषि, रहन-सहन, धार्मिक आस्थाओं, त्योहारों और ग्रामीण परंपराओं को सामने लाने का प्रयास पुस्तक को एक आत्मीय स्वर देता है।
इस पुस्तक की सबसे अच्छी बात इसका भेरी के लोकजीवन से जुड़ाव है। भेरी के बुजुर्गों की स्मृतियाँ और पुरानी पीढ़ियों से चली आ रही बातें भेरी की वास्तविक पहचान हैं। लेखक ने इन्हीं बिखरी हुई स्मृतियों को एक जगह संजोने का प्रयास किया है। आज जब भेरी जैसे गाँव तेजी से बदल रहे हैं और पुरानी जीवन-शैली तथा परंपराएँ धीरे-धीरे पीछे छूट रही हैं, ऐसे प्रयास का महत्व और बढ़ जाता है।
समर्पण के पृष्ठ से लेकर भूमिका तक लेखक का भेरी, अपने माता-पिता, परिवार और अपनी जन्मभूमि के प्रति लगाव दिखाई देता है। यही आत्मीयता पुस्तक को महज एक ऐतिहासिक विवरण बनने से बचाती है। इसमें एक ऐसे व्यक्ति की भावनाएँ दिखाई देती हैं, जो भेरी की जड़ों को भूलना नहीं चाहता और आने वाली पीढ़ी को भेरी की कहानी से जोड़ना चाहता है।
कुल मिलाकर, ‘भेरी अकबरपुर की जड़ें, जज़्बात और हालात’ भेरी की मिट्टी, भेरी के लोगों और भेरी की स्मृतियों को शब्दों में सुरक्षित रखने का एक ईमानदार प्रयास है। यह पुस्तक विशेष रूप से भेरी अकबरपुर और आसपास के क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भावनात्मक महत्व रखती है। स्थानीय इतिहास और ग्रामीण संस्कृति में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए भी यह एक उपयोगी दस्तावेज़ साबित हो सकती है। यह पुस्तक पढ़ते हुए केवल भेरी अकबरपुर का इतिहास नहीं मिलता, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़े रहने की एक सच्ची भावना भी महसूस होती है।
पुस्तक विवरण
शीर्षक: भेरी अकबरपुर की जड़ें, जज़्बात और हालात
लेखक: कवि रामकुमार रानोलिया
प्रकाशक: प्रज्ञानशाला, आर.के. फीचर्स प्रकाशन (पंजीकृत), भिवानी (हरियाणा)
प्रथम संस्करण: 2026
ISBN: 978-81-998925-0-7
मूल्य: ₹299/-
कॉपीराइट: © 2026 — कवि रामकुमार रानोलिया द्वारा सुरक्षित
भाषा: हिंदी
विधा/स्वरूप: ग्रामीण इतिहास, संस्मरण, लोक-संस्कृति एवं सामाजिक दस्तावेज़
— डॉ. सत्यवान सौरभ
पीएचडी (राजनीति विज्ञान), कवि एवं सामाजिक विचारक
333, परी वाटिका, कौशल्या भवन,
बड़वा (सिवानी), भिवानी, हरियाणा – 127045
मोबाइल: 9466526148, 01255281381
(डॉ. सत्यवान सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), एक कवि और सामाजिक विचारक है।)
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