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यह पुस्तक हिंदुओं की एक पवित्र धार्मिक पुस्तक है। जिसमें जागृत शक्ति पीठ मां मुंगरौल देवी की महिमा का चौपाई के रूप में वर्णन किया गया है।उत्तर प्रदेश के गोंडा जनपद के मुजेहना विकास खंड में दतौली- धानेपुर मार्ग पर रामनगर बाजार के निकट मुंगरौल ग्राम में स्थित माँ मुंगरौल देवी मंदिर एक प्राचीन और जागृत शक्तिपीठ है, जिसका इतिहास हज़ारों वर्ष पुराना माना जाता है। मान्यता के अनुसार, राजा दक्ष के यज्ञकुंड में माता सती के आत्मदाह के बाद, जब शिव उनके पार्थिव शरीर को ले जा रहे थे, तब इस स्थान पर माता की अंगुली का 'मूंगा' गिरा था, जिससे यह 'मुंगरौल देवी' कहलाईं। यह मौलिहार शुक्ल वंश की कुलदेवी हैं।
पुस्तक के शुरुवात में कष्ट विनाशक भगवान गणेश जी की वंदना सवैया छंद में वर्णित है।
इस पुस्तक को जो सच्चे मन से पढ़ता है माता रानी उसके कष्टों को दूर कर मनवांछित फल प्रदान करती हैं। जय माता जी की।।
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