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## पुस्तक का विवरण
**क्या कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी को दिल से चाहते थे, लेकिन अपने दिल की बात कभी कह नहीं पाए?**
**"अधूरी बात, पूरा प्यार"** सिर्फ़ एक प्रेम कहानी नहीं, बल्कि उन अनगिनत रिश्तों की कहानी है जो प्यार की कमी से नहीं, बल्कि खामोशी और गलतफ़हमियों की वजह से टूट जाते हैं।
प्रियांश और प्रार्थना—दो कॉलेज के दोस्त, जो धीरे-धीरे एक-दूसरे की आदत बन जाते हैं। दोनों एक-दूसरे से बेइंतहा प्यार करते हैं, लेकिन कभी अपने जज़्बात ज़ुबान तक नहीं ला पाते। समय बीतता है, दूरियाँ बढ़ती हैं, गलतफ़हमियाँ रिश्ते की जगह ले लेती हैं और एक दिन दोनों अलग हो जाते हैं।
लेकिन क्या सच्चा प्यार सिर्फ़ एक गलतफ़हमी से खत्म हो सकता है?
क्या कभी-कभी एक छोटी-सी हिम्मत वर्षों की दूरियों को मिटा सकती है?
भावनाओं, दोस्ती, इंतज़ार, दर्द और उम्मीद से भरी यह कहानी आपको हँसाएगी, रुलाएगी और शायद आपकी ज़िंदगी के किसी ऐसे इंसान की याद भी दिला देगी, जिससे आप आज तक अपने दिल की बात नहीं कह पाए।
अगर आपने कभी किसी को खोया है...
या किसी को खोने से डरते हैं...
तो यह कहानी आपके दिल तक ज़रूर पहुँचेगी।
**क्योंकि कई बार... अधूरी बातें ही सबसे ज़्यादा तकलीफ़ देती हैं।**
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