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पुस्तक परिचय
हर सपना पूरा नहीं होता… लेकिन हर सपना हमें कुछ न कुछ ज़रूर सिखाकर जाता है।
"जिस दिन मैंने बल्ला रख दिया" केवल क्रिकेट की कहानी नहीं है। यह उस लड़के की कहानी है जिसने अपने जीवन का सबसे बड़ा सपना देखा, उसे पाने के लिए दिन-रात मेहनत की, लेकिन परिस्थितियों ने उससे उसका सबसे प्रिय साथी—उसका बल्ला—छीन लिया।
यह पुस्तक संघर्ष, असफलता, चोट, मानसिक पीड़ा, परिवार के त्याग, माता-पिता के निस्वार्थ प्रेम और फिर से जीवन को नए अर्थ के साथ जीने की यात्रा है। यह बताती है कि कभी-कभी जीवन हमारी मंज़िल बदल देता है, लेकिन हमारी पहचान नहीं।
यदि आपने भी कभी किसी सपने के लिए सब कुछ दाँव पर लगाया है…
यदि आपने कभी हार का दर्द महसूस किया है…
यदि आपको लगता है कि आपकी कहानी यहीं समाप्त हो गई है…
तो यह पुस्तक आपको याद दिलाएगी कि अंत अक्सर एक नई शुरुआत की पहली पंक्ति होता है।
यह केवल एक खिलाड़ी की कहानी नहीं,
यह हर उस इंसान की कहानी है जिसने कभी कोई सपना देखा था।
लेखक
Krishnapratap Singh
Instagram: @krishnapratap0807
Email: skrishnapratap628@gmail.com
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