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आत्मपीडा

अमरत्वप्रेम
LAKHAN SINGH
Type: Print Book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹199 + shipping
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Description

यह कृति प्रेम, पीड़ा, मृत्यु और अमरत्व की एक अद्वितीय यात्रा है। इसमें कवि ने जीवन की अंतिम घड़ियों से लेकर आत्मा और ईश्वर के मिलन तक के अनुभवों को काव्यात्मक पद्य में पिरोया है।

पुस्तक का आरंभ उस क्षण से होता है जब मनुष्य मृत्यु की देहलीज़ पर खड़ा है। शरीर शिथिल हो रहा है, इंद्रियाँ बंद हो रही हैं, लेकिन चेतना के अंतिम छोर पर भी केवल एक ही नाम गूँजता है—“प्रिये।” यही “अंतिम ख्याल” जीवन और प्रेम दोनों की पराकाष्ठा बन जाता है।

इसके बाद कवि जीवन को एक अभिनय मानते हुए कहता है—“बहुत हुआ अभिनय, अब चलें यहाँ से।” यहाँ पाठक को अपने अस्तित्व का दर्पण दिखाई देता है। प्रेम, मृत्यु और अस्तित्व का यह द्वंद्व पाठक को भीतर तक छू लेता है।

फिर कवि हिसाब-किताब की निरर्थकता को उजागर करता है। जीवन के सारे बंधन, सारे आरोप अंततः व्यर्थ सिद्ध होते हैं। केवल प्रेम ही शेष रह जाता है।

काव्य में प्रेम को कभी अजीब, कभी तूफ़ान-सा प्रचंड, तो कभी नक़ाब के पीछे छिपा हुआ रूप मिलता है। हर कविता मनुष्य के अनुभवों का आईना है।

“यात्रा” श्रृंखला पुस्तक का हृदय है। यहाँ प्रेमी-प्रेमिका की कथा एक करुण त्रासदी की तरह खुलती है—ज़हर, मृत्यु, कब्र, आत्मा का विलाप, और अंततः मृत्यु से परे जाकर आत्माओं का मिलन। यहाँ प्रेम सांसारिक नहीं रह जाता, बल्कि शाश्वत और दिव्य बन जाता है।

अंतिम भाग में कवि पाठक को प्रेम की डगर पर चलने का निमंत्रण देता है। वह कहता है—“तू प्रेम बाँट ले।” यही प्रेम जीवन का सार है, यही अमरत्व का रहस्य।

पूरी पुस्तक एक आत्मस्वीकृति है, एक गहन साधना है। यह पाठक को झकझोरती है, उसकी आत्मा से संवाद करती है, और उसे सोचने पर विवश करती है—क्या प्रेम केवल एक भावना है, या यह वह शक्ति है जो मृत्यु के पार भी जीवित रहती है?

About the Author

लखन सिंह, पुत्र श्री रामवीर सिंह, भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के पचावर गाँव (ज़िला मथुरा – 281308) के निवासी हैं। वे शिक्षक हैं। उन्होंने विज्ञान में स्नातक और योग विज्ञान में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है। शिक्षा ग्रहण करना और ध्यान तथा योग का अभ्यास उनकी विशेष रुचि है। इसके अलावा, संगीत सुनना उन्हें प्रिय है। उन्होंने अनुभव किया है कि संगीत स्वयं में एक प्रकार का योग है।
उनकी कविता "आत्मविसर्जन" आत्म-चिंतन और जीवन के गहरे अनुभवों को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है। लेखन में उन्हें प्रेरणा "आत्म प्रिये" से मिली, जिनकी उपस्थिति एवं अनुपस्थिति ने उन्हें अपने भीतर झाँकने और अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने का मार्ग दिखाया।
संपर्क :
✉️ lakhansinghlsp456@gmail.com

Book Details

ISBN: 9789359375366
Publisher: LAKHAN SINGH
Number of Pages: 37
Dimensions: 5"x8"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Saddle Stitched)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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