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मुसाफ़िर
“मुसाफ़िर” एक अधूरी मोहब्बत, बिछड़ने के दर्द और यादों के सफ़र की कहानी है। यह कविता संग्रह उस एहसास को शब्द देता है, जब कोई ख़ास इंसान हमारी ज़िंदगी में आता है, कुछ खूबसूरत यादें छोड़ जाता है और फिर अपनी राह चला जाता है।
इन कविताओं में प्रेम की शुरुआत से लेकर भरोसे, बिछड़ने, तन्हाई, यादों और अंततः स्वीकार करने तक का सफ़र दिखाई देता है। कभी दिल सवाल करता है, कभी पुरानी यादें लौट आती हैं, और कभी इंसान समझ पाता है कि हर रिश्ता हमेशा के लिए नहीं होता।
“मुसाफ़िर” उन सभी के लिए है जिन्होंने किसी को सच्चे दिल से चाहा, उसे खोया, और फिर उसकी यादों के साथ आगे बढ़ना सीखा।
क्योंकि कुछ लोग हमारी मंज़िल नहीं होते—
वे बस हमारी ज़िंदगी के सफ़र में
एक ख़ूबसूरत मुसाफ़िर बनकर आते हैं।
— Lakhyadeep Konwar
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