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शूद्र की पहचान Identity of the Shudra

पहचान की राजनीति से परे — श्रम की गरिमा, ऐतिहासिक सत्य और एक न्यायपूर्ण सार्वभौमिक समाज की स्थापना का मार्ग ।
Mahipal Singh Tandan
Type: Print Book
Genre: Social Science
Language: Hindi
Price: ₹501 + shipping
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Description

Identity of the Shudra (शूद्र की पहचान)

जाति की सीमाओं से परे—इतिहास, पहचान और श्रम की गरिमा की एक वैचारिक यात्रा।

Identity of the Shudra (शूद्र की पहचान) एक विचारोत्तेजक गैर-काल्पनिक पुस्तक है, जो भारतीय समाज में वर्ण-व्यवस्था, जाति, सामाजिक असमानता और शूद्र पहचान से जुड़े ऐतिहासिक एवं वैचारिक प्रश्नों की पड़ताल करती है। यह पुस्तक पाठकों को प्राचीन ग्रंथों, भाषाई व्याख्याओं, ऐतिहासिक विवरणों, सामाजिक संरचनाओं और आधुनिक शोध के संदर्भ में प्रचलित धारणाओं पर गंभीरता से विचार करने के लिए आमंत्रित करती है।

शूद्र कौन थे? वर्ण और जाति की अवधारणाओं का विकास कैसे हुआ? भाषा, धार्मिक व्याख्याओं, सामाजिक परंपराओं और ऐतिहासिक परिस्थितियों ने लोगों की पहचान तथा सामाजिक स्थिति को किस प्रकार प्रभावित किया? ये ऐसे महत्वपूर्ण प्रश्न हैं, जिन पर यह पुस्तक विभिन्न दृष्टिकोणों और संदर्भों के माध्यम से विमर्श प्रस्तुत करती है।

पुस्तक का उद्देश्य केवल अतीत को समझना नहीं, बल्कि वर्तमान समाज में पहचान, समानता, सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा से जुड़े प्रश्नों को भी सामने लाना है। यह श्रम को सम्मान देने, ऐतिहासिक धारणाओं की आलोचनात्मक समीक्षा करने और जातिगत विभाजनों से ऊपर उठकर एक अधिक न्यायपूर्ण एवं समतामूलक समाज की कल्पना करने की दिशा में विचार प्रस्तुत करती है।

यह पुस्तक इतिहास, भारतीय समाज, जाति-व्यवस्था, सामाजिक परिवर्तन और वंचित समुदायों की पहचान में रुचि रखने वाले पाठकों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा सामाजिक चिंतकों के लिए उपयोगी विचार-विमर्श का आधार बन सकती है।

यह केवल पहचान की खोज नहीं, बल्कि इतिहास को समझने, स्थापित धारणाओं पर प्रश्न उठाने और श्रम की गरिमा तथा समान मानवीय सम्मान को स्वीकार करने की दिशा में एक वैचारिक प्रयास है।

यदि आप भारतीय समाज की ऐतिहासिक संरचना, शूद्र पहचान और सामाजिक समानता के प्रश्नों को नए दृष्टिकोण से समझना चाहते हैं, तो Identity of the Shudra (शूद्र की पहचान) आपके अध्ययन और चिंतन के लिए एक महत्वपूर्ण पुस्तक है।

About the Author

महिपाल सिंह टंडन (Mahipal Singh Tandan) सामाजिक इतिहास, मानवीय गरिमा, श्रम के सम्मान और सामाजिक समानता से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लेखक हैं। उनका लेखन भारतीय समाज की ऐतिहासिक संरचनाओं, जातिगत पहचान, सामाजिक असमानता और वंचित समुदायों के अनुभवों को समझने की दिशा में एक वैचारिक प्रयास है।

वे इतिहास और सामाजिक परंपराओं से जुड़ी स्थापित धारणाओं पर प्रश्न उठाने तथा पाठकों को स्वतंत्र चिंतन के लिए प्रेरित करने में विश्वास रखते हैं। उनकी लेखकीय दृष्टि का केंद्र समानता, न्याय, मानवीय सम्मान और श्रम की प्रतिष्ठा है। वे ऐसे समाज की कल्पना करते हैं, जहाँ किसी व्यक्ति की गरिमा का निर्धारण उसकी जाति या सामाजिक पृष्ठभूमि से नहीं, बल्कि उसकी मानवता और कर्म से हो।

Identity of the Shudra (शूद्र की पहचान) के माध्यम से लेखक ने शूद्र पहचान, वर्ण-व्यवस्था, सामाजिक इतिहास और समानता के प्रश्नों पर विचार-विमर्श प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। उनकी लेखकीय अभिलाषा है कि पाठक इतिहास को गंभीरता से समझें, सामाजिक धारणाओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन करें और एक अधिक न्यायपूर्ण, समतामूलक तथा मानवीय समाज के निर्माण में अपनी भूमिका पहचानें।

Book Details

ISBN: 9789334570472
Publisher: Mahipal Singh Tandan
Number of Pages: 298
Dimensions: 6"x9"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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