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धूप का टुकड़ा

Manish Roy
Type: Print Book
Genre: Romance
Language: Hindi
Price: ₹317 + shipping
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Description

पुस्तक परिचय — धूप का टुकड़ा
कुछ रिश्ते ख़त्म नहीं होते—वे बस वक़्त, दूरी और ख़ामोशी के पीछे कहीं छुप जाते हैं।
मीरा वर्षों बाद लखनऊ लौटती है—अपनी नानी की पुरानी हवेली बेचने के लिए। उसके लिए वह घर सिर्फ़ एक जर्जर इमारत नहीं, बल्कि बचपन की धुंधली यादों, अधूरी बातों और उन सवालों का हिस्सा है जिनसे वह बरसों से दूर भागती रही है।
हवेली का पुराना नीला दरवाज़ा, नानी की डायरी, कुछ तस्वीरें और एक के बाद एक खुलते संदूक उसके सामने बीते हुए रिश्तों की ऐसी कहानी खोलने लगते हैं, जिसे वह कभी पूरी तरह जान ही नहीं पाई थी।
इसी लौटने के दौरान उसकी मुलाक़ात होती है कबीर से—एक ऐसा आदमी जो पुराने दरवाज़ों की मरम्मत करता है, लेकिन अपने भीतर के कई अधूरे किस्सों को अब भी संभाले हुए है। हवेली की मरम्मत के बहाने शुरू हुई उनकी मुलाक़ातें धीरे-धीरे चाय, तस्वीरों, चिट्ठियों और उन ख़ामोश पलों में बदलने लगती हैं जहाँ बहुत कुछ बिना कहे भी समझ आने लगता है।
मीरा और कबीर के बीच का रिश्ता किसी अचानक हुई मोहब्बत की कहानी नहीं है। यह उन दो लोगों की कहानी है जो अपने-अपने अतीत का बोझ लेकर एक-दूसरे के सामने खड़े होते हैं—और धीरे-धीरे समझते हैं कि किसी रिश्ते को पाने से पहले कभी-कभी अपने भीतर बहुत कुछ छोड़ना पड़ता है।
लेकिन हर कहानी में एक ऐसा मोड़ आता है जहाँ प्यार और ज़िंदगी को एक-दूसरे के सामने चुनना पड़ता है।
क्या लौटना सिर्फ़ अलविदा कहने के लिए होता है?
या कुछ लौटने इसलिए भी होते हैं कि अधूरी मोहब्बत को एक और मौका मिल सके?
धूप का टुकड़ा यादों, रिश्तों, घर और मोहब्बत की एक शांत, संवेदनशील कहानी है—उन चीज़ों की कहानी जो पूरी तरह कभी हमारी नहीं होतीं, फिर भी ज़िंदगी भर हमारे साथ चलती रहती हैं।
मनीष रॉय की यह प्रेम-कथा उन पाठकों के लिए है जिन्हें मोहब्बत में शोर नहीं, बल्कि उसकी ख़ामोशी सुनना पसंद है।

About the Author

लेखक परिचय — मनीष रॉय
मनीष रॉय रिश्तों, यादों और ज़िंदगी के उन अनकहे पहलुओं को अपनी कहानियों में जगह देने वाले कथाकार हैं, जहाँ भावनाएँ अक्सर शब्दों से ज़्यादा ख़ामोशी में कही जाती हैं।
उनकी लेखनी में रिश्तों की बारीकियाँ, बीते हुए वक़्त की गर्माहट और रोज़मर्रा की छोटी-छोटी चीज़ों में छुपे बड़े एहसास दिखाई देते हैं। वे प्रेम को सिर्फ़ एक रोमांटिक रिश्ते के रूप में नहीं, बल्कि याद, अपनापन, दूरी, लौटना और साथ बने रहने की एक गहरी अनुभूति के रूप में देखते हैं।
धूप का टुकड़ा उनकी एक संवेदनशील प्रेम-कथा है—एक ऐसी कहानी जिसमें पुराने घर, तस्वीरें, चिट्ठियाँ और अधूरी यादें दो लोगों को अपने अतीत और एक-दूसरे के करीब लाती हैं।
मनीष रॉय की कोशिश है कि उनकी कहानियाँ पाठक को सिर्फ़ पढ़ने का अनुभव न दें, बल्कि किसी भूली हुई याद, किसी पुराने रिश्ते या अपने ही दिल के किसी कोने से मिलने का एहसास भी दें।

Book Details

Number of Pages: 258
Dimensions: 6"x9"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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