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सदगुरु प्रेम के निर्झर...

मनोज कुमार धुर्वे ...
Type: Print Book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹190 + shipping
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Description

माँ को जब हम तू जैसे साधारण से प्रतीत होने वाले शब्दो से प्रेम के आदर के सागर मे डुबोकर बोलते है , तो यह कोई अनुचित नही समझा जाता ! सचमुच , प्रेम की अपनी अलग एक निराली दुनिया है ,एक अलग संसार है ! जब ऐसा ही प्रेम अपने सदगुरु के प्रति सराबोर हो कर छलक पड़ता है तो उस शिस्य का कल्याण हो जाता है ! संत कबीरदास जी ने सत्य ही और अतीव सुंदर कहा है -
जैसी प्रीति कुटुम्ब की तैसी गुरु से होय !
कहें कबीर ता दास को पला न पकड़े कोय !!
जो धानभागी लोग अपने गुरु के प्रति ऐसे ही प्रेम भाव से भरे होते है जो नियमो की सीमा से परे है , कहा जाता है प्रेम मे नेम नही होता ! उन्हीं के लिए जिन्हे ये मार्ग भा गया है और जो इस मार्ग पर आ गया है ! इन काव्य पंक्तियो को उनके कर कमलो में देते हुए अत्यंत आनंद का भाव उमड़ रहा है

२९.१०.२०१२
मनोज कुमार धुर्वे
Email ID : sahyogg@rediffmail.com

About the Author

कवि के प्रति
श्री मनोज कुमार धुर्वे का जन्म सन् १९७९ मे,मध्यप्रदेश मे,छिंदवाडा जिले के अंतर्गत बिछुआ विकास खंड के सामरबोह नामक ग्राम में,एक मध्यमवर्गीय किसान परिवार में हुआ ! इनकी प्रारंभिक शिक्षा म.प्र. के ग्रामीण परिवेश मे संपन्न हुई ! हाई स्कूल एवं डिप्लोमा एंजिनरिंग की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उतीर्ण करने के बाद NIELIT नई दिल्ली से उन्होने आई.टी.में O एवं A लेवेल कोर्स की परीक्षा उतीर्ण की है !
ईश्वर के प्रति तिवरा जिगयाशा से अभिभूत हो अपनी डिग्री इंजिनियरिंग की डिग्री १९९९ में अधूरी छोड़ कर अपनी ज्ञान पीपासा की शांति के उपाय खोजने वे घेर से निकल पड़े ! इसके उपरांत उन्होने अपने जीवन के १० वर्ष अपने गुरु आश्रम में साधानरात हो कर व्यतीत किए !
एक दीर्घकालीन गहन अभ्यास एवं अनुभूतियो के आनंद से परिपूर्ण यह काव्य अन्य कृतीयो के साथ वही पेर रचा गया है ! वर्तमान में वे अध्यात्म के उपरांत सामाजिक,सांस्कृतिक एवं सॉफ़्टवेर इंजिनियरिंग के विभिन्न क्रियाकलापो मे संलग्न है !

Book Details

Number of Pages: 90
Dimensions: 5"x7"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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