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क्या यक्षिणियाँ केवल लोककथाओं का हिस्सा हैं, या इस ब्रह्मांड की एक अत्यंत शक्तिशाली और वास्तविक सत्ता?**
सदियों से साधारण जनमानस में यक्षिणियों को लेकर कई तरह की भ्रांतियां और अकारण भय व्याप्त है। लोग अज्ञानतावश इन्हें भूत-प्रेत, पिशाच या नकारात्मक शक्तियां मान लेते हैं। परंतु सत्य इससे कोसों दूर है! तंत्र शास्त्रों के अनुसार, यक्षिणियां वास्तव में देव-कोटि (उप-देवता) से संबंध रखने वाली अत्यंत सुंदर, शक्तिशाली और कुबेर लोक (अलकापुरी) की ऐश्वर्यशाली सत्ता हैं।
*'यक्षिणी लोक का द्वार (भाग 1): माया, रहस्य, प्रत्यक्षीकरण एवं प्रामाणिक साधना विधान'* तंत्र विज्ञान के उस अत्यंत गुप्त और रहस्यमय मार्ग का एक प्रामाणिक मानचित्र है, जिसे आज तक केवल सिद्ध गुरुओं की गुप्त परंपराओं में ही संरक्षित किया जाता रहा है। लेखक मनोज कुमार 'रमन' ने अपने गहन अनुभवों और गुरु-कृपा से, यक्षिणी विद्या के रहस्यों को अत्यंत सरल, सुरक्षित और वैज्ञानिक रूप में प्रस्तुत किया है।
*इस अद्भुत ग्रंथ में आप जानेंगे:*
* *रहस्यमयी दुनिया का पर्दाफाश:* यक्ष लोक, अलकापुरी का सूक्ष्म रहस्य और यक्षिणी, अप्सरा, योगिनी तथा किन्नरी के बीच का वास्तविक आध्यात्मिक अंतर।
* *साधना का विज्ञान:* सफलता की अनिवार्य कुंजियाँ—गुरु दीक्षा, शिव-भैरव आज्ञा, उचित आसन, यंत्र, प्राण-प्रतिष्ठित माला और ब्रह्मचर्य का महत्व।
* *संबंधों का विधान:* यक्षिणी को माता, बहन, पुत्री या प्रेमिका के रूप में सिद्ध करने के अचूक नियम और उनके परिणाम।
* *प्रामाणिक साधना विधियां:* अष्ट यक्षिणियों में से विशेष रूप से 'सुरसुन्दरी', 'मनोहारिणी' और 'प्रमोदा' यक्षिणी के अत्यंत गुप्त मंत्र, स्तुतियां और प्रत्यक्षीकरण (प्रकट होने) के बाद वचनों के आदान-प्रदान का पूर्ण विधान।
यह ग्रंथ केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि दरिद्रता के अंधकार से निकलकर ऐश्वर्य, परम आनंद और अलौकिक ज्ञान के शिखर तक पहुँचने की एक प्रायोगिक कुंजी है।
*यदि आपके भीतर ब्रह्मांड की सूक्ष्म शक्तियों को समझने और पूर्ण निष्ठा के साथ तंत्र के सबसे सुरक्षित व शीघ्र फलदायी मार्ग पर चलने की पिपासा है, तो यह पुस्तक केवल और केवल आपके लिए है!*
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